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फर्जी छात्रों को 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षा दिलवाने में बलिया सबसे आगे है। इस साल जिन प्राइवेट अभ्यर्थियों के पंजीकरण निरस्त किये गये है उनमें सर्वाधिक संख्या बलिया से है। हालांकि आजमगढ़, जौनपुर, गोरखपुर, गाजीपुर और मेरठ भी फर्जीवाड़े में पीछे नहीं है।
यूपी बोर्ड ने इस साल 87429 छात्र-छात्राओं के पंजीकरण निरस्त किये हैं। इनमें 49303 हाईस्कूल और 38126 इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए पंजीकृत थे। शिक्षा माफियाओं ने नकल के सहारे परीक्षा पास कराने का ठेका लेते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन परीक्षार्थियों का पंजीकरण करा दिया था।

बलिया में 14852 (9679 हाईस्कूल और 5173 इंटर) फार्म निरस्त हुए हैं जबकि आजमगढ़ में 8362, जौनपुर 6579, गोरखपुर 6104, गाजीपुर 7877 और मेरठ में 5019 ऐसे पंजीकरण निरस्त किए गए हैं।

प्रतापगढ़, कौशाम्बी और फतेहपुर भी कम नहीं
बोर्ड मुख्यालय के आसपास के जिलों में भी फर्जीवाड़े का धंधा खूब फूल-फल रहा है। इलाहाबाद मंडल की ही बात करें तो कौशाम्बी में 1681, प्रतापगढ़ में 2691 और फतेहपुर में 1729 रजिस्ट्रेशन निरस्त किये गये हैं। इलाहाबाद में 603 फर्जी नामांकन रद्द किये गये हैं।

सालों से चल रहा नकल-माफियाओं का खेल
नकल माफियाओं का खेल सालों से चल रहा है। यूपी बोर्ड की परीक्षा में नकल के भरोसे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की डिग्री दिलाने के कारण पर हर साल करोड़ों का वारा-न्यारा होता है। देश का शायद ही ऐसा कोई राज्य हो जहां के दस्तावेज लगाकर बाहरी छात्र-छात्राओं को यूपी बोर्ड की परीक्षा न दिलाई जाती हो। सारा खेल प्राइवेट परीक्षार्थी के नाम पर होता है।

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