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यूपी बोर्ड परीक्षा का सवाल बच्चों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। परीक्षा किसी भी कीमत पर नकलविहीन संपन्न कराई जानी है। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर मंडल में कमिश्नर और जेडी व जिले में डीएम और डीआईओएस जिम्मेदार होंगे। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी मंडलों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में नकल रोकने की अपनी मंशा को स्पष्ट किया। उन्होंने एसएसपी की भी जिम्मेदारी तय करते हुए कहा कि सुरक्षा और नकल रोकने में उनकी अहम भूमिका रहेगी। इसके लिए जो भी आवश्यक कदम हो, वह उठाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कहा कि बोर्ड परीक्षा में छात्र-छात्राओं को किसी भी कीमत पर अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। लेकिन उनको यह संदेश जाना चाहिए कि यह परीक्षा उनके भविष्य के निर्माण के लिए हो रही है। लेकिन अगर किसी ने बच्चों का भविष्य बिगाड़ने की कोशिश की, तो वे उसका भविष्य बिगाड़ देंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आजकल काफी लोग शिक्षा को व्यवसाय बना रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

संयुक्त शिक्षा निदेशक और डीआईओएस इन परीक्षाओं के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार रहेंगे। अगर कोई गड़बड़ी मिलती है, तो वे ही दोषी माने जाएंगे। निर्देशित किया कि परीक्षा के समय और उसके बाद उत्तर पुस्तिकाओं की ट्रकों की लोडिंग आदि की वीडियोग्राफी कराई जाए।

प्रत्येक केंद्र पर नकल रोकेंगे दो-दो असलहाधारी पुलिसकर्मी
छह फरवरी से शुरू हो रही यूपी बोर्ड की परीक्षा नकलविहीन कराने के लिए प्रत्येक सेंटर पर दो-दो असलहाधारी तैनात रहेंगे। 323 केंद्रों पर सशस्त्र पुलिस की तैनाती की जाएगी ताकि नकल के लिए बाहर से पड़ने वाले दबाव को खत्म किया जा सके। जिले के 21 अतिसंवेदनशील और 76 संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर नकल रोकने के अलग से इंतजाम किए जाएंगे।

मंडल स्तर पर चार, जनपद स्तर पर नौ और ब्लाकों में 24 फ्लाइंग स्क्वायड टीम लगाई जाएगी। सभी टीम के साथ दो-दो सशस्त्र पुलिसवाले रहेंगे। परीक्षा केंद्र व ब्लाक से लेकर मंडल स्तर तक गठित फ्लाइंग स्क्वायड के साथ 700 से अधिक पुलिसवाले लगाये जा रहे हैं। सभी केंद्रों को 37 सेक्टर में बांटा गया है जहां प्रशासन की ओर से सेक्टर मजिस्ट्रेट लगाए जाएंगे।

शिक्षकों ने बोर्ड परीक्षाओं के बहिष्कार का ऐलान किया
वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों ने यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के बहिष्कार का ऐलान किया है। 6 फरवरी से शुरू हो रही परीक्षाओं में न तो वे कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी करेंगे और न ही मूल्यांकन।
वित्तविहीन शिक्षक महासभा के प्रदेश अध्यक्ष व शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी ने पत्रकारों से कहा कि प्रदेश सरकार ने वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों का मानदेय बंद कर दिया है। लम्बे संघर्ष के बाद पिछली सरकार ने मानदेय के रूप में 200 करोड़ रुपये जारी किये थे। लगभग दो लाख शिक्षकों को मानदेय का फायदा मिलना था। वर्तमान सरकार ने बिना कोई कारण बताए इस मानदेय को बंद कर दिया है।

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