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गोरखपुर के गांवों में महिलाओं की एक सरकार चल रही है। ये ‘ सरकार ‘  फरियादी महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से लेती हैं। दोनों पक्षों को बुलाकर उनकी बात सुनती हैं। गुण-दोष के आधार पर पूरी संवेदनशीलता से फैसले सुनाती हैं और उस पर अमल कराने की भरसक कोशिश करती हैं। यह सरकार रुपये जुटाकर बैंक खातों में जमा करती हैं और समूह की महिलाओं को स्वावलम्बी बनाने के लिए कर्ज देती हैं।

देवरिया जिले की रेनू मिश्रा ने वर्ष 2000 में ब्रह्मपुर ब्लाक के पकड़पुरा गांव की संगीता और नई बाजार की रेनू गुप्ता से मिलकर उन्हें स्वावलम्बी बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने टिप्स दिया कि अपने पास-पड़ोस की महिलाओं को जोड़ें और उन्हें एक-एक रुपये रोज बचाने के लिए प्रेरित करें। संगीता और रेनू ने इस पर अमल किया और महीने में महिलाओं का समूह बनाना शुरू कर दिया। समूह की महिलाएं महीने में 30-30 रुपये बचाने लगीं। संगीता और रेनू ने समूह का बैंक में खाता खोल लिया। महिलाएं उसमें बाकायदा 30-30 रुपया महीने जमा करने लगीं। बैंक खाते में कुछ मोटी रकम हो गई तो महिलाओं को स्वावलम्बी बनाने के लिए कर्ज देना शुरू कर दिया। अब ब्रह्मपुर ब्लाक में 35 से अधिक गांवों में ऐसे समूह चल रहे हैं।

इन समूहों से मामूली ब्याज पर कर्ज लेकर महिलाओं ने गाय-भैंस और बकरी पालन शुरू कर दिया। कुछ ने सब्जी और अन्य कारोबार शुरू कर दिया। ये महिलाएं अब अच्छी कमाई कर रही हैं। इस समूह की ताकत बढ़ी तो इसने महिलाओं की समस्याओं को नारीवादी तरीके से सोचना-समझना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे महिलाओं का यह संगठन आस-पास के गांवों में मजबूत होता गया। अब महिलाएं बाकायदा अदालतें लगाती हैं। उनकी समस्याओं पर मंथन करती हैं। जरूरत महसूस होने पर दोनों पक्षों को बैठकर सुनवाई करती हैं। उचित-अनुचित की परख कर ईमानदारी से फैसले सुनाती हैं। महिलाओं का यह संगठन अब ब्रह्मपुर, पिपराइच, भटहट और खजनी ब्लाक में भी सक्रिय हो गया है। महिला समाख्या इन्हें प्रेरित करती है। महिला एवं बाल विकास विभाग बाकायदे इनकी मदद करता है।
महिलाओं के फैसले

केस : एक
कैथलिया गांव निवासिनी जानकी के पति चंद्रदेव के बीच अनबन हो गई। जानकी को उसके पति ने घर से निकाल दिया था। जानकी के मायके वालों ने समूह के समक्ष अपनी बात रखी। 15 दिसम्बर को ब्रह्मपुर ब्लाक पर महिलाओं ने अदालत लगाई। समझौता हुआ और जानकी को उसका पति चंद्रदेव विदा कराकर अपने घर ले गया।

केस : दो 
ब्रह्मपुर ब्लाक के नई बाजार में 23 जनवरी को बच्चों के विवाद को लेकर दोनों परिवार भिड़ गए। दोनों ने पुलिस में शिकायत कर दी। समूह की महिलाओं को जानकारी हुई तो परिवारों को बैठाकर उन्हें समझाया-बुझाया। उनके बीच सुलह कराई। समूह की महिलाएं दोनों परिवारों को लेकर पुलिस चौकी पर पहुंच गईं । दोनों पक्षों ने खुद को संतुष्ट बताते हुए अपनी शिकायत वापस ले ली।

अदालत ऐसे करती है काम
एक पक्ष जब अपनी समस्या महिला अदालत में लेकर आता है तो सदस्य पूरी बात ध्यान से सुनती हैं। इसके बाद महिला अदालत की सदस्य दूसरे पक्ष को बुलाने के लिए रजिस्टर्ड पत्र भेजती हैं। दूसरे पक्ष के न आने पर अदालत स्वयं उनके घर पहुंच जाती है। तारीख तय कर अदालत बैठती है और दोनों पक्षों को आमने-सामने कर सुनवाई करती है। अदालत में निष्पक्ष और नारीवादी तरीके से संवेदनशीलता के साथ तक-वितर्क और विष्लेषण के साथ फैसला सुनाया जाता है।

इन मामलों में हस्तक्षेप करती है अदालत
महिलाओं के साथ मारपीट, भेदभाव, कन्या भ्रूण हत्या, दहेज उत्पीड़न, शादी तोड़ने और छेड़छाड़ जैसे मामलों में महिलाओं की अदालत हस्तक्षेप करती है। पीड़ित का पक्ष सुनकर आरोपित से जवाब मांगती है। गुण-दोष के आधार पर फैसला सुनाती है। अदालत की सदस्य लगातार निगरानी करती हैं और उनकी पूरी कोशिश होती है दोनों पक्ष फैसले पर अमल करें। फैसले पर अमल न करने पर वे विधिक प्रक्रिया में पीड़ित की मदद  करती है।

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