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सासनी। कर्क चतुर्थी अर्थात करवा चैथ ब्रत
हिन्दुस्तान के प्रत्येक क्षेत्र में मनाए जाने वाला
त्यौहार है, इसमें महिलायें अपने पति की आयु तथा परिवार
मंे सुख समृद्धि की कामना करती है। इसके बारे में विस्तृत
जानकारी देते हुए पंडित मुकेश शास्त्री इगलास एवं पं.
राजकृष्ण शास्त्री सासनी ने संयुक्त बताया कि यह ब्रत कार्तिक
मास के कृ-ुनवजयण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है, यह ब्रत
सौभाग्य बती स्त्रियों द्वारा अपने अखण्ड सौभाग्य,
(सुहाग)पति के स्वस्थ एवं दीर्घायु होने की मंगल
कामना के लिए किया जाता है।
उन्होंने बताया कि इस ब्रत को करने से पुत्र पौत्र,
धन धान्य, सौभाग्य एवं अतुल य-रु39या की प्राप्ति होती है।
सौभाग्य बती स्त्रियां एक दिन पहले स्नानादि कर हाथों
में मेहंदी रचाती हैं। और करबा चैथ के दिन साज
श्रंगार, मंगल गान करती हैं, यह ब्रत निराहार ही नहीं अपितु
निर्जला के रूप में करना अधिक लाभदायक माना जाता है। इस
ब्रत में -िरु39याव पार्वती, कार्तिकेय और गौरी का पूजन करने
का विधान है।चन्द्रमा, -िरु39याव, पार्वती, स्वामी कार्तिकेय
और गौरी की मूर्तियों की बिधिबत पूजा करके एक तांबे
या मिट्टी के पात्र मैं चावल, उर्द की दाल, सुहाग की
सामिग्री जैसे सिंदूर ,चुड़िया,-रु39याी-रु39याा, कंघी, रिबन, और

रुपया रख कर किसी श्रे-ुनवजयठ सुहागिन स्त्री या अपनी सास के पैर छूकर
उनको भेंट कर देनी चाहिए।सायं काल की बेला में
कथा सुनें तत्प-रु39यचात जब रात्रि में पूर्ण चंद्रोदय हो जाये
तब चन्द्रमा को छलनी से देख कर अर्घ दें, आरती उतारें
और अपने पति का द-रु39र्यान करते हुए पूजा करें इससे पति की
लंबी उम्र होती है। चंद्रोदय का समय रात्रि 08 बजकर 34
मिनट पर होगा। तभी माता बहिनें अपने वृत को पूर्णकर
विधिवत पूजा अर्चना के साथ चंद्रमा को अघ्र्य अर्पित कर
भोजन ग्रहण करेंगी ।

INPUT – Avid hussain

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