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हाथरस : पद्म विभूषण से सम्मानित परम पूज्य जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी को हाथरस में श्री राम कथा में उपस्थित विशेष अतिथि गणो, संतों महात्माओं तथा अपार जनसमूह की गरिमामयी उपस्थिति में सनातन मंदिर चेतना सोसाइटी द्वारा सनातन धर्म रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
सनातन मंदिर चेतना सोसायटी द्वारा सनातन धर्म रत्न वर्ष 2019 का पुरस्कार जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज को उनके सनातन धर्म के प्रति समर्पण एवं उत्कृष्ट कार्यो के लिए दिया गया।

पूज्य जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी का संपूर्ण जीवन सनातन धर्म एवं दिव्यांगों के उत्थान के लिए समर्पित रहा है। दिव्यांगों के लिए किए गए उनके प्रयासों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। आप जगदगुरू रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के आजीवन कुलाधिपति भी हैं आपने श्री राम कथा एवं भागवत कथा के साथ-साथ अनेक मंदिरों की स्थापना की एवं अनेक मंदिरों को संरक्षित करने की प्रेरणा प्रदान की है। जिसमें कानपुर का बिठूर स्थित भारत का प्रथम मनु सतरूपा मंदिर भी एक है ।आपने भारत के इतिहास में प्रथम बार मनुस्मृति के आलोक में रामचरितमानस पर व्याख्यान देकर मनुस्मृति के बारे में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने के साथ-साथ भारत में सामाजिक समरसता भी स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। पूज्य जगद्गुरु जी ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर के पक्ष में अकाट्य साक्ष्य प्रस्तुत किए जिसके कारण माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का रूख श्री रामलला के पक्ष में हुआ।
संस्था द्वारा इस पुरस्कार में एक चांदी का मेडल एवं प्रमाण पत्र के साथ ₹100000 का चेक पूज्य जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज को भेंट किया गया।

सनातन मंदिर चेतना सोसाइटी सनातन धर्म के प्राचीन मंदिरों के जिर्णोद्धार तथा मंदिरों के माध्यम से धर्म संस्कृति एवं मनुष्यों में नैतिक व आध्यात्मिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करने के लिए प्रयासरत एक सामाजिक संस्था है। संस्था ने विगत 6 वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में 13 उपेक्षित प्राचीन मंदिरों को जन सहयोग से संरक्षित करने में सफलता पाकर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के धरोहर बचाने में जन भागीदारी जरूरी के संकल्प को पूरा करने में तन मन धन से काम कर रही है।
संस्था के सदस्य अजय कुमार मिश्र ने बताया कि मंदिर एक सामाजिक चेतना का केंद्र है जहां से सांस्कृतिक पुनर्जागरण होता है समय के प्रवाह में हमारे मंदिर केवल कर्मकांड का स्थान बनकर रह गए हैं जहां भक्त एवं पुजारी अपनी अनवरत इच्छाओं की पूर्ति हेतु याचना करते रहते हैं । आदि शंकराचार्य जी ने हिंदू पुनर्जागरण के लिए इसे फिर से प्रतिष्ठित करने का कार्य किया है। मंदिरों के माध्यम से भारतीय परंपराओं एवं ज्ञान का प्रचार प्रसार हो और बदलते समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति भी इसी उद्देश्य के साथ सनातन मंदिर चेतना से सोसाइटी ने इन मंदिरों का जीर्णोद्धार कर उनकी महिमा को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया है।
सनातन मंदिर चेतना सोसाइटी ने निर्णय लिया है कि सनातन धर्म रत्न पुरस्कार प्रत्येक वर्ष सनातन धर्म के उत्थान के लिए महनीय प्रयासरत महानुभावों को दिया जाएगा। संस्था का विश्वास है कि ईश्वर की अनंत कृपा के फलस्वरूप यह पुरस्कार भारत रत्न एवं नोबेल पुरस्कारों की तरह संपूर्ण विश्व में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाएगा एवं संपूर्ण विश्व में एकमात्र सनातन धर्म को प्रतिष्ठित करने में महनीय भूमिका निभाएगा एवं प्रेरणा प्रदान करेगा।
पूज्य जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ने संस्था के इन प्रयासों की सराहना करते हुए आशीर्वाद दिया तथा निरंतर इस कार्य को करते रहने की प्रेरणा दी।

इस कार्यक्रम में संस्था के सदस्य महेश तिवारी ,प्रमोद शुक्ला, के. के. शुक्ला , विजय लालवानी, विनय मिश्रा, नीतू सिंह चौहान, अनिल पांडे आदि उपस्थित रहे।

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