Visitors have accessed this post 207 times.

ज्ञान कराना व संस्कारित करना आवश्यक
सनातन संस्कृति में जन व विश्व कल्याण की भावना निहित है नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति का ज्ञान कराना आवश्यक
विद्वत गोष्ठी में मथुरा, वृंदावन व गोवर्धन के विद्वानों का हुआ संगम ।

गोवर्धन। सनातन संस्कृति के वर्तमान परिपेक्ष्य में श्रीमद्भागवत कथा आयोजन समिति के द्वारा परिक्रमा मार्ग के माहेश्वरी भवन में विद्वत गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में मथुरा, वृंदावन एवं गोवर्धन के विद्वतजनों ने भाग लिया। शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर संस्थापक पं. अमित भारद्वाज व श्रीकृष्ण शास्त्री ने संयुक्त रूप से किया गया। गोष्ठी में आचार्य लालजीभाई शास्त्री एवं पंडित अमित भारद्वाज ने कहा की वसुधैव कुटुंबकम की भावना प्रदर्शित करने वाली सनातन संस्कृति में विश्व कल्याण की भावना निहित है। इस संस्कृति में राग व द्वेष लिए कोई स्थान नही बल्कि सभी के प्रति समान भाव की भावना निहित है। हरिदास सोमदत्त दीक्षित शास्त्री ने कहा की वर्तमान में हमें अपनी नयी पीढ़ी को जो पाश्चात्य संस्कृति को और बढ़ रही है उसे अपनी प्राचीन सनातन संस्कृति का ज्ञान कराना परम आवश्यक हो गया है। आचार्य बद्रीश ने कहा कि वर्तमान में राष्ट्र व विश्व में जो विषम परिस्थिति बनी हुई है उसका निदान सनातन धर्म व सनातन संस्कृति की भावना से ही संभव है। आचार्य पूर्ण प्रकाश कौशिक ने कहा कि जनहितार्थ व जनकल्याण के उद्देश्य वाली सनातन संस्कृति सदैव सदमार्ग प्रशस्त करके जीवन मूल्यों का उंन्नयन करती है। अध्यक्षता वैष्णवाचार्य संत राजा बाबा व संचालन डा. विनोद दीक्षित ने किया इस अवसर पर स्वामी जगदीश्वरानंद, अशोक शास्त्री, साध्वी नंदी देवी शास्त्री, घनश्याम बंग, गोविंददास मालपानी, गोपाल नागपुरी, दामोदर प्रसाद आदि थे।

INPUT – Ashu kaushik

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here