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गोवर्धन के देवकीनंदन कुम्हेरिया को गार्ड आॅनर देते पुलिसकर्मी अपनी कविताओं पर हंसाने वाले ब्रजभाषा के प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार लोकतंत्र सैनानी देवकी नंदन कुम्हेरिया का निधन  लोकतंत्र सेनानी को राजकीय सम्मान के साथ हुई अंतिम विदाई ।

गोवर्धन। ब्रज साहित्य परिषद न्यास के संस्थापक एवं कार्यकारी अध्यक्ष, लोकतंत्र सैनानी व ब्रजभाषा के प्रसिद्ध कवि, वरिष्ठ पत्रकार  व साहित्यकार देवकी नंदन कुम्हेरिया (87) का मंगलवार को निधन हो गया। उन्होंने अपने बड़ा बाजार अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उन्होंने अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ा है। देवकी नंदन कुम्हेरिया ने जय प्रकाश नारायण के आह्वान पर 1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपात काल का विरोध किया था। इनके साथ गोवर्धन में पांच सदस्यीय टीम ने सत्याग्रह कर गोवर्धन थाने पर जोरदार प्रदर्शन किया था। वे इमरजेंसी में जेल गये थे। उनके निधन को अपूर्णनीय क्षति बताया। एसडीएम राहुल यादव, सीओ जितेन्द्र कुमार ने पुष्प अर्पित किये। अधिकारियों की मौजूदगी में पुलिस के जवानों ने राजकीय सम्मान के तहत गार्ड ऑफ ऑनर दिया। अंतिम यात्रा में भारत माता की जय और अमर शहीदों की जय-जयकार गूंजती रही। उनको ज्येष्ठ पुत्र कृष्ण कांत कुम्हेरिया ने मुखाग्नि दी। इस अवसर पर चेयरमैन खेमचंद शर्मा, जितेन्द्र सिंह तरकर, कपिल सेठ, ज्ञानेन्द्र सिंह राणा, ओमप्रकाश शर्मा, मनोज पाठक, परशुराम सिंह, सियाराम शर्मा, केशव मुखिया आदि थे। वहीं दूसरी ओर उनके निधन को साहित्यकारों ने अपूर्णनीय क्षति बताया है। उनकी रचनाओं में ब्रज रस माधुरी, पत्नी-पुराण, गिर्राज-वंदना तथा हम फागुन में ससुरार गए जैसी अपनी लगभग एक दर्जन कृतियों से मां सरस्वती के भंडार में योगदान देने वाले कुम्हेरिया लगभग 60 वर्षों से कवि-सम्मेलनों के मंच पर सक्रिय रहे। प्रारंभ में आपने कई समाचार पत्रों के लिए गोवर्धन से समाचार प्रेषण का कार्य भी किया। साहित्यिक सेवाओं के लिए कुम्हेरिया जी को साहित्य-मण्डल नाथ द्वारा द्वारा ब्रजभाषा-विभूषण की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था। इसके अतिरिक्त उन्हें श्री पीतलिया-स्मृति सम्मान तथा सूर श्याम सेवा मण्डल द्वारा महाकवि सूर सम्मान जैसे प्रतिष्ठित सम्मान भी समय-समय पर प्राप्त किये। प्रारंभ से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता रहे। कुम्हेरिया ने आपातकाल तथा मीसा का जोरदार विरोध किया था जिसके कारण उन्हें 19 माह की अवधि जेल में काटनी पड़ी थी। बाद में मुलायम सिंह यादव सरकार द्वारा इसके लिए उन्हें लोकतंत्र सेनानी के रूप में सम्मानित भी किया गया था। उनके निधन पर पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया, राम निवास शर्मा अधीर, अशोक अज्ञ, राधा गोविंद पाठक, डॉ.नटवर नागर, उपेन्द्र त्रिपाठी, श्रीकृष्ण शरद, डॉ.अनिल गहलौत, संतोष कुमार सिंह तीर्थ पुरोहित महासंघ के महामंत्री अमित भारद्वाज आदि साहित्यकारों ने उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ब्रजभाषा साहित्य की अपूरणीय क्षति बताया है।