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मान्यता है कि शारदीय नवरात्रि माता दुर्गा की आराधना का श्रेष्ठ समय होता है। नवरात्र के इन पावन दिनों में हर दिन मां के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, जो अपने भक्तों को खुशी, शक्ति और ज्ञान प्रदान करती है। नवरात्रि का हर दिन देवी के विशिष्ठ रूप को समर्पित होता है और हर देवी स्वरुप की कृपा से अलग-अलग तरह के मनोरथ पूर्ण होते हैं।नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना का पर्व है। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ ही नवरात्रि शुरू हो जाती हैं. साथ ही विभिन्न पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर मां शक्ति की आराधना की जाती है। नवरात्रि पर मां दुर्गा के धरती पर आगमन का विशेष महत्व होता है. देवीभागवत पुराण के अनुसार नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा का आगमन भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत के रूप में भी देखा जाता है। हर वर्ष नवरात्रि में देवी दुर्गा का आगमन अलग-अलग वाहनों में सवार होकर आती हैं और उसका अलग-अलग महत्व होता है। शारदीय नवरात्र शक्ति पर्व है।हिन्दू धर्म में इस पर्व को विशेष महत्व दिया गया है।17 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 45 मिनट के बाद शुभ मुहूर्त में घट स्थापित करें। नौ दिनों तक अलग-अलग माताओं की विभिन्न पूजा उपचारों से पूजन, अखंड दीप साधना, व्रत उपवास, दुर्गा सप्तशती व नवार्ण मंत्र का जप करें। अष्टमी को हवन व नवमी को नौ कन्याओं का पूजन करें। वैश्विक महामारी कोरोना के चलते चैत्र की नवरात्र में मां की विधिवत आराधना नहीं हो सकी थी। मां से हम सब देश वासी प्रार्थना करते हैं कि हमें शीघ्र ही इस महामारी व भय से मुक्त करें।

input: komal agrawal

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