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अर्थ सोल चक्रों से डिस्कनेक्शन

मौत से लगभग चार-पांच घंटे पहले इंसान के पैरों के नीचे स्थित अर्थ सोल चक्र अलग हो जाते हैं जिसका मतलब है धरती की सतह से संबंध टूट जाना इंसान की मृत्यु से कुछ घंटे पहले उसके पैर ठंडे पड़ जाते हैं जब मृत्यु का सही समय आता है तो कहा जाता है। मृत्यु के देवता यम आते हैं और उसकी आत्मा को लेकर चले जाते हैं

Astral code Tut Jata Hai

जब मृत्यु होती है तो एस्ट्रोल कोड टूट जाता है जो कि एक तरह से आत्मा और शरीर का कनेक्शन होता है जिसकी टूटने से आत्मा शरीर से मुक्त हो जाती है और शरीर से बाहर और ऊपर निकल जाती है जैसे हमारे लिए किसी की मृत्यु को स्वीकार करना मुश्किल होता है वैसे ही आत्मा भी मृत्यु को स्वीकार नहीं कर पाती है और शरीर में प्रवेश करने की कोशिश करती है लेकिन एस्ट्रोल कोर्ट टूटने की वजह से आत्मा शरीर में फिर से प्रवेश नहीं कर पाती है और वह ऊपर की ओर उड़ने लगती है।

भौतिक शरीर का अंत

इस चरण में उस आत्मा को लोगों के विचार आवाज एक सौर की तरह सुनाई देते हैं और वह सभी से बात करने की कोशिश करती है और कहती है मैं अभी मरी नहीं हूं जिंदा हूं लेकिन उसे कोई नहीं सुन पाता उस समय मैं उस व्यक्ति की आत्मा छत के ऊपर उड़ती है और जो होता है उसे देखती और सुनती है

शरीर से छुटकारा

जब अंतिम क्रिया होती है तो आत्मा मान लेती है कि उसका धरती पर रहने का माध्यम खत्म हो चुका है तब आत्मा अपने शरीर से आजाद हो जाती है सारी रुकावटें और सीमाएं उसकी टूट जाती है और फिर वह अपनी मनपसंदीदा जगह जाती है वहां वक्त बिताती है 7 दिन तक और फिर 7 दिन बाद आत्मा धरती को अलविदा करती है और दूसरी दुनिया में प्रवेश करती है

Astral board Mein Pravesh karna

कहते हैं मरने के बाद एक सुरंग होती है जो आत्मा को पार करनी होती है। तभी कहा जाता है कि इंसान की मृत्यु के बाद 12 दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं और हमें सारे रीति रिवाज सब ठीक से करने होते हैं जो हम रीति-रिवाज करते हैं और प्रार्थना करते हैं वह सब आत्मा के लिए भोजन का काम करता है लेकिन जब मरने वाले के घर वाले यह रीति रिबाज़ नहीं करते तो आत्मा सुरंग को पार नहीं कर पाती है और फिर यही धरती पर फंस जाती है और भटकती है ।

जब भी कोई आत्मा मरने से पहले किसी के साथ बुरा करती है तो वह मरने के बाद पछताती है और अपने लिए सजा मांगती है और फिर जो सजा मांगती है वही उससे अगले जन्म में भोगने को मिलता है बहुत से लोग कहते हैं हमारी किस्मत खराब है लेकिन ऐसा नहीं होता है। जो हम पिछले कर्म में सजा के रूप में मांगते हैं वही हमें इस जनम में भोकने को मिलती है जो हम अपने लिए सजा लिखते हैं उससे ब्लूप्रिंट कहते हैं जब हमारा दूसरा जन्म होता है तो हमारी कुंडली में वह ब्लूप्रिंट के रूप में सब लिखा होता है तभी कहते हैं किसी के साथ कुछ भी गलत करो तो माफी मांग लेनी चाहिए क्योंकि जो हम किसी के साथ गलत करते हैं तो उसी को हम मरने के बाद साथ लेकर जाते हैं और अपने लिए सजा खुद लिखते हैं किसी बीमारी से ग्रसित होना या किसी भी कारण से मरना यह सब हम खुद ब्लूप्रिंट एग्रीमेंट में लिखते हैं इसी तरीके से हम इस जनम में अपने पिछले जन्म द्वारा लिखी गई सजा को भों

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