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मध्य प्रदेश के जिला दतिया से 65 किलोमीटर दूर बसा है रतनगढ़ जहां रतनगढ़ माता के नाम से पर्वत पर विराजमान माता रतनगढ़ माता के नाम से फेमस हैं मंदिर में सोमवार को लाखों भक्त आकर के दर्शन करते हैं और एक विशाल मेले का आयोजन भी होता है मंदिर सुबह 4:00 बजे खुलता है और रात को 8:00 बजे बंद होता है लोग सीढ़ियों से चढ़कर के माता के दर्शन के लिए पर्वत से ऊपर जाते हैं साथ ही भक्त अपना निजी वाहन भी मंदिर तक दूसरे रास्ते से ले जा सकते हैं माता जी के बगल में ही कुंवर महाराज जी का मंदिर बना हुआ है कहते हैं यह माता जी के भाई थे अगर किसी को सिर्फ काट लेता है तो माता जी के नाम का बांध लगाकर उस रोगी को माता के मंदिर पर लाते हैं और वहां की मट्ठी लगाते ही भक्तों ठीक हो जाता है और दीपावली के भाई दूज वाले दिन उस भक्तों को कुणाला करके उमर महाराज के मंदिर में बांध को खोलते हैं जिससे वह हमेशा के लिए ठीक हो जाता है भक्त अपनी कई मनोकामना यहां आकर के मानते हैं और जिन भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है वह मंदिर में घंटे चढ़ाते हैं कई घंटों को एकत्रित करके एक विशाल घंटे को बनाकर के मंदिर में टांगा गया है जो कि विश्व में फेमस है रतनगढ़ मंदिर के चारों ओर वीराने का दृश्य देखने को मिलता है दूर तक ऊंचे नीचे पहाड़ देखने को मिलते हैं

रिपोर्ट : विजय कुमार

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