Visitors have accessed this post 45 times.

अलीगढ़ : देशभर से लेकर प्रदेश में भी कोरोना महामारी ने एक बार फिर अपने पैर पसार लिए हैं,,,देश भर में कोविड पॉजिटिव से लेकर मौतों का आंकड़ा एक बार फिर सभी के माथे पर चिंता की लकीरें खींचता हुआ नज़र आ रहा है,इस महामारी से बचाव के लिए प्रदेश की योगी सरकार ने कुछ निर्णय लिए हैं,जिसमें प्रमुख रूप से ज़्यादा कोरोना पॉज़िटिव वाले इलाकों में ज़िलाधिकारी के माध्यम आए रात्रि कर्फ़्यू लगाए गए हैं तो वहीं लोगों को एकत्रित होने से रोकने के लिए नवरात्रि व रमज़ान से पूर्व निर्णय लिया गया कि धार्मिक स्थलों पर एक समय में 5 लोगों से ज़्यादा की अनुमति प्रदान नहीं कि जाएगी,प्रदेश सरकार के इस निर्णय को लेकर एएमयू के धर्म शास्त्र विभाग के लोगों व इस्लामिक स्कॉलर लोगों का अलग निर्णय है,,,उनका कहना है कि एक तरफ सरकार शादी में 100 लोगों की अनुमति दे रही है तो वहीं धार्मिक स्थलों पर मात्र 5 लोगों को जाने की अनुमति दी गई है ये निर्णय अजीबोगरीब है.एएमयू स्कॉलर व सुन्नी थेयोलॉजी डिपार्टमेंट के पूर्व विभागाध्यक्ष ने इस निर्णय को लेकर कहा कि शादी के लिए 100 लोगों की दी गई है और धर्मस्थलों के लिए 5 लोगों की दी गई है,ये गलत है ये अजेबोग़रीब है,एक जैसा होना चाहिए,,दूसरी बात इलेक्शन चल रहे हैं तो मेरे हिसाब से जब तक ये महामारी काम नहीं हो जाती तब तक इलेक्शन भी 2 से 4 महीने टाल देने चाहिए,,शादियों में भी लोगों की तादाद को कम कर देना चाहिए,,,धर्मस्थलों में कम से कम 10 लोगों की इजाज़त दी जानी चाहिए,,क़ानून लगाने के बजाए डॉक्टरों को भेजकर ये समझाया जाए कि 3 3 फीट की दूरी से नमाज़ पढ़ें व जो भी धार्मिक कार्य करने हैं वो करें,,कानून का डंडा चलाने के बजाए लोगों को जाकर ख़ुद समझाया जाए कि वह इससे किए खुद का बचाव करें. सुन्नी थेयोलॉजी डिपार्टमेंट के सहायक प्रोफेसर ने इन मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जहाँ तक मुसलमानों की इबादतगाहों का मसला है और इस वक़्त हम लोगों के सामने रमज़ान उल मुबारक का पाक महीना है,इस महीने के आगमन की तैयारियां पूरे साल होती हैं,,,इस महीने को लेकर मुसलमानों में बहुत उत्साह रहता है,,,कोरोना की दूसरी लहार से सबहि देश परेशान हैं,,हिंदुस्तान में अकेले सवा लाख से ज़्यादा मामले प्रतिदिन आ रहे हैं,,कोरोना जैसी बीमारी जो छूने से होती है तो निश्चित ही धार्मिक स्थलों पर लोगों का मिलना मिलाना होता है तो लोगों को इससे बचना चाहिए लेकिन मुसलमान पहले से इन सबहि बातों की एहतियात कर रहा है सोशल डिस्टनसिंग का पालन कर रहा है,,सरकार को चाहिए कि लोगों की तादाद बढ़ाये,,कोविड 19 का जो पालन करना है उसके लिए सख़्ती बरते,सरकार को मंदिर मस्जिद कमेटी को ज़िम्मेदार लोग हैं उनसे भी इस को लेकर चर्चा करनी चाहिए,क्योंकि मार्किट,,बैंक सब्ज़ी मंडी ऐसी जगहों पर लोगों की भीड़ है,,न मास्क है ना सोशल डिस्टनसिंग बल्कि मंदिर,,,मस्जिद गुरुद्वारों में कोविड 19 के नियमों का पालन हो रहा है,,सरकार को धार्मिक स्थलों में 5 से ज़्यादा लोगों को अनुमति देनी चाहिए.

यह भी पढ़े : दुनिया के 5 अनोखे पंछी जिन्हें आपने पहले कभी नहीं देखा होगा

अपने क्षेत्र की खबरों के लिए डाउनलोड करें TV30 INDIA एप

http://is.gd/ApbsnE

sasni new wave