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कोरोना काल में तरह-तरह की तस्वीरें देखने को मिल रही है। कहीं किसी मरीज के लिए बेड नहीं मिल रहा है तो कहीं ऑक्सीजन की किल्लत से लोग परेशान हैं। लेकिन अलीगढ़ के दीनदयाल कोविड अस्पताल का स्टाफ इतना संवेदनहीन हो गया कि पिछले 3 दिनों से एक युवक अपनी मृत मां के शव को लेने के लिए चक्कर काट रहा है। लेकिन उसे कोई भी सटीक जवाब ना देकर तहलाया जा रहा है। इतना ही नहीं, युवक ने हॉस्पिटल स्टाफ के एक कर्मचारी पर यह भी आरोप लगाया है कि शव देने के नाम पर ₹8000 की डिमांड की गई है। और कहा गया है कि शव का अंतिम संस्कार करने के लिए यह रुपए जमा करने होते हैं।

दरअसल थाना क्वार्सी इलाके के बेगम बाग निवासी करीब 80 वर्षीय बीना घोष जो कि मूलतः कलकत्ता की रहने वाली थीं। यहाँ गाँधी आई हॉस्पिटल से रिटायर्ड कर्मचारी थीं। जिनकी रिपोर्ट कोविड पॉजिटिव आने पर 24 अप्रैल को दीनदयाल हॉस्पिटल की एम्बुलेंस ले आई और भर्ती कर दिया गया। लेकिन महिला की 30 अप्रैल की शाम को मृत्यु हो गई। महिला के बेटे शंकर ने आरोप लगाया है कि वह 30 तारीख से ही हॉस्पिटल के चक्कर काट रहा है। सुबह 7:00 बजे हॉस्पिटल पहुंच गया। रात को 11:00 बजे तक भी हॉस्पिटल स्टाफ ने कोई बात नहीं बताई। मृत्यु को आज 3 दिन बीत चुके हैं लेकिन हॉस्पिटल स्टाफ ने महिला के शव की कोई जानकारी नहीं दी है। शंकर का यह भी आरोप है कि किसी एक कर्मचारी ने शव देने के नाम पर ₹8000 की डिमांड भी की,, शंकर के मुताबिक कर्मचारी ने कहा था कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मृत्यु के बाद उसके दाह संस्कार में जो खर्चा आता है उसी के लिए यह ₹8000 लिए जा रहे हैं। युवक गरीब होने के कारण 8 हजार रुपये दे नहीं सका तो शव भी नहीं मिल सका। बेचारा युवक अपनी मां के शव के लिए पिछले 3 दिन से हॉस्पिटल के चक्कर काटने को मजबूर है। लेकिन उसकी यहां कोई सुनने वाला नहीं है।

Input – मोहम्मद शाहनवाज

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