Visitors have accessed this post 74 times.

अलीगढ़ : कोरोना संक्रमण काल में जहां कुछ हेल्थ वर्कर ड्यूटी से कतरा रहे हैं, वहीं 66 साल के डा. बालकिशन में मरीजों की सेवा का जज्बा कम नहीं हुआ है। सेवानिवृत्त होने के बाद भी अस्पताल और मरीजों से नाता नहीं तोड़ा। सक्रिय रूप से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हुए हैं। कभी डब्ल्यूएचओ की ओर से मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए भागदौड़ की तो कभी संविदा पर नौकरी कर ओपीडी में मरीजों का इलाज किया। कोविड प्रोटोकाल के अनुसार 65 साल के बाद कोविड ड्यूटी पर रोक है, मगर डा. बालकिशन को मंडल के सबसे बड़े पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के कोविड केयर सेंटर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया।

यहां उन्होंने मरीजों की सेवा में दिनरात एक कर दी। पिता बनकर मरीजों को संभाला। उनके अपनत्व से मरीजों को दिल जीत लिया। मरीज डिस्चार्ज होने के बाद उनका आभार व्यक्त करना नहीं भूलते। अस्पताल में बेहतर सुविधाएं मिलें, इसके लिए डा. बालकिशन ने पूरा प्रयास किया। फिलहाल डॉ० बालकिशन सीएमओ ऑफिस से अटैच्ड हैं।

डा. बालकिशन मूल रूप से हाथरस जनपद के पुरदिल नगर के हैं। तीन बेटियों की शादी हो चुकी है। बेटे का व्यवसाय है। डा. बालकिशन 1987 में सरकारी सेवा में आए। बरेली, एटा व अलीगढ़ के अकराबाद में सीएचसी इंचार्ज बने। एटा में डिप्टी सीएमओ रहे। 2004-05 में बुलंदशहर व 2005 से 2007 तक अलीगढ़ में डिप्टी सीएमओ का पद संभाला। 2008-09 में ललितपुर के सीएमअो बनाए गए। 2010 में मलखान सिंह जिला अस्पताल व 2011 में दीनदयाल अस्पताल के सीएमएस की जिम्मेदारी संभाली।दोनों अस्पतालों को उत्कृष्टता प्रमाण-पत्र दिलवाए। 31 जनवरी 2016 को सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्त होने के बाद ज्यादातर चिकित्सक जहां मरीजों से दूरी बना लेते हैं, वहीं डा. बालकिशन मरीजों से जुड़े रहना चाहते थे। पुनर्नियोजन लेकर जिला अस्पताल की ओपोडी में मरीज देखे। डब्ल्यूएचओ से जुड़े और मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान की मानीटरिंग के लिए गांव-गांव दौड़े। फिर, सीएमओ के अधीन आए, जो जिम्मेदारी मिली वो संभाली। दो जनवरी को 65 साल की आयु पूर्ण हो गई, लेकिन जिला प्रशासन ने उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत पुुन: सेवा में ले लिया। 22 अगस्त 2020 को डा. बालकिशन को दीनदयाल कोविड अस्पताल का नोडल अधिकारी बनाया गया। यहां 66 साल की उम्र में डा. बालकिशन ने खूब मेहनत की। मरीजों के एडमिशन व डिस्चार्ज की व्यवस्था, कोविड वार्डों का निरीक्षण, मरीजों को समुचित इलाज व अन्य समस्याअों का समाधान कराने का पूरा प्रयास किया। हालांकि, काफी लोगों ने सहयोग नहीं किया। खुद अस्पताल प्रबंधन भी उदासीन रहा। संविदा पर नियुक्ति होने के कारण स्टाफ पर पहले जैसा दबाव नहीं बन पाया, जिससे सेवाअों में सुधार होता। फिर भी, जितना हो सकता था, भागदौड़ करते रहे। मनमाफिक सुविधाएं व सहयोग न मिलने पर सीएमअो को इस्तीफा भी देना चाहा, मगर समझाने पर मान गए। पिछले दिनों उन्हें छेरत होम्योपैथी मेडिकल कालेज स्थित कोविड सेंटर का प्रभारी बनाया गया है। डा. बालकिशन का कहना है कि जब तक जिंदगी है, मरीजों के बीच रहना चाहता हूं। कोविड के समय डाक्टरों की जरूरत है, इसलिए मैंने कोविड की जिम्मेदारी खुद आगे आकर ली। असल में यही जिंदगी है।

input : moh sahenwaj

यह भी पढ़े : जाने क्यों शव यात्रा मे राम नाम का नारा लगाया जाता है।

अपने क्षेत्र की खबरों के लिए डाउनलोड करें TV30 INDIA एप

http://is.gd/ApbsnE

sasni new wave