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दिल्ली : कोरोनाकल में चारों तरफ से संवेदनहीनता की खबरें सामने आ रही हैं। कई मामलों में तो कोविड संक्तिमतों के परिजनों ने भी मुंह मोड़ लिया है। ऐसे में भुवनेश्वर से एक ऐसी खबर आई है जो कोरोनाकल में मिसाल बन गई है। यहां की एक महिला ने कोविड संक्रमित और लावारिश शवों के अंतिम संस्कार करने में अपने पति की मदद करने के लिए कोलकाता के फोर्टिस अस्पताल में अच्छी सेलरी वाली नर्स की नौकरी छोड़ दी।

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कोरोनाकाल में लोगों को अपनी आजीविका चलना सबसे बड़ी चुनौती लग रहा है। ऐसे में हर कोई किसी भी स्थिति में अपनी आजीविका का साधन नहीं खोना चाहता है। इसके बावजूद कुछ लोग ऐसे हैं जो निस्वार्थ रूप से मानव सेवा में लगे हुए हैं। ऐसा ही एक उदाहरण भुवनेश्वर में एक महिला ने पेश किया है जो लोगों के लिए मिसाल बन गया है। यहां की एक महिला मधुस्मिता प्रुस्टी ने कोविड संक्रमित व लावारिश शवों के अंतिम संस्कार में अपने पति की मदद करने के लिए कोलकाता के फोर्टिस अस्पताल की नर्सिंग की नौकरी छोड़ दी है। दरअसल उनके पति एक ट्रस्ट चलाते हैं। वे लावारिश शवों का अंतिम संस्कार करते है। लेकिन कुछ समय पहले उनके पति के पैर में चोट लग गई। जिसके चलते शवों का अंतिम संस्कार करने में उन्हें परेशानी हो रही थी। इसलिए मधुस्मिता प्रुस्टी ने अपनी नौकरी छोड़ दी और यहां चली आईं। उन्होंने बताया कि वे पिछले साल कोविड संक्रमित 300 शवों का अंतिम संस्कार कर चुकी हैं।

इनपुट : दिल्ली व्यूरो

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