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गंगा दशहरा के दिन लोग दूर-दूर से गंगा में स्नान करने के लिए आते हैं ऐसा माना जाता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा में स्नान करने से 10 पाप को मां गंगा खुद हर लेती है इसीलिए गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान का बहुत ही ज्यादा महत्व है। 10 पाप हरने की वजह से ही इस दिन को गंगा दशहरा कहा जाता है।10 पाप इसमें से 3 कायिक पाप होते हैं, 4 वाचिक और 3 मानसिक पाप होते हैं. कायिक पाप का अर्थ होता है काया यानी हमारे शरीर से जुड़े पाप. वाचिक यानी वाणी संबंधी पाप और मानसिक पाप यानी जो आप अपनी सोच और मानसिकता से करते हैं।

गंगा दशहरा क्यों मनाया जाता है गंगा दसहेरा इसलिए मनाया जाता है क्युकी इस दिन भागीरथ को अपने पूर्वजों की अस्थियां किसी निर्मल जल में विसर्जित करनी थी. इसलिए उन्होंने भगवान शंकर की घोर तपस्या की और मां गंगा को धरती पर लाने में कामयाब हुए. लेकिन मां गंगा का भाव इतना तेज था कि यदि वह धरती पर सीधे उतर जातीं तो समस्त धरती वासी उनके जल में समाहित हो जाते. इसलिए मां गंगा ने भागीरथ को कहा कि यदि भगवान शिव मुझे अपनी जटाओं में समा कर पृथ्वी पर मेरी धारा प्रवाह कर दें तो यह संभव हो सकता है.

भागीरथ ने भगवान शंकर की तपस्या की. भगवान शंकर के प्रसन्न होने पर भागीरथ ने उनसे सारी बात बताई और भगवान शिव से गंगा को अपनी जटाओं में समाहित करने के लिए प्रार्थना की. इसके बाद मांं गंगा ब्रह्मा जी के कमंडल में समा गई और फिर ब्रह्मा जी ने शिव जी की जटाओं में गंगा को प्रवाहित कर दिया, जिसके बाद शिव ने गंगा की एक चोटी सी धारा पृथ्वी की ओर प्रवाहित कर दी. भागीरथ के कठिन तप के कारण मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ इसलिए उन्हें भागीरथी के नाम से भी जाना जाता है. जिस दिन मां गंगा धरती पर उतरीं वह ज्येष्ठ शुक्ल दशमी थी. इसलिए हर साल इस तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है।

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