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हाथरस : राजकीय बाल सम्प्रेक्षण गृह, मथुरा में जनपद न्यायाधीश सुनील कुमार सिंह-प्रथम के आदेशानुसार कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हाथरस के तत्वावधान में ऑनलाइन वीडियो क्रान्फ्रेसिंग के माध्यम से निरीक्षण एंव विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन चेतना सिंह, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हाथरस की अध्यक्षता में किया गया। सचिव चेतना सिंह द्वारा राजकीय बाल सम्प्रेक्षण गृह, मथुरा में रह रहे किशोरों से बातचीत की गयी तथा उनके खान-पान के बारे में पूछा गया। बच्चों ने खाने के बारे में बताया की आज सुबह के नाश्ते में उनको पराठे और चाय दी गयी तथा उनका प्रातःकालीन भोजन तैयार है। वर्तमान समय में बाल सम्प्रेक्षण गृह, मथुरा में कुल 87 बच्चें रह रहे हैं, जिसमें 24 बच्चे जनपद हाथरस से सम्बन्धित है। किसी भी किशोर द्वारा कोई परेशानी नहीं बतायी है। इसके अतिरिक्त शिविर में उपस्थित बालकों को जानकारी देते हुये अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उनके अनुकूल विधिक सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों द्वारा यदि कोई अपराध किया जाता है किशोर न्याय अधिनियम में उसे बाल अपचारी माना जाता है। जब किसी बच्चे द्वारा कोई कानून-विरोधी या समाज विरोधी कार्य किया जाता है तो उसे किशोर अपराध या बाल अपराध कहते हैं। कानूनी दृष्टिकोण से बाल अपराध 8 वर्ष से अधिक तथा 16 वर्ष से कम आयु के बालक द्वारा किया गया कानूनी विरोधी कार्य है जिसे कानूनी कार्यवाही के लिये बाल न्यायालय के समक्ष उपस्थित किया जाता है। उन्होंने सभी बालकों को कहा है कि अगर कोई गरीब है तथा उसके पास मुकद्दमा लडने के लिए पैसे नही हैं तो वह अपने अधीक्षक के माध्यम से एक निःशुल्क अधिवक्ता नियुक्त करवाने हेतु प्रार्थना पत्र जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हाथरस के कार्यालय में भिजवा सकता है।
इसके अतिरिक्त उन्होंने कोविड-19 में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा चलाई जा रही ‘‘बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं और उनके सरंक्षण के लिए विधिक सेवा योजना-2015’’ एंव उ0प्र0 मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना-2021 की जानकारी देते हुये बताया कि जो बच्चे अपने माता-पिता को खो चुके हैं, उनके जीवन को संवारने के लिये उ0प्र0 मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का शुभारम्भ किया गया है इसका मूल उद्देश्य पेरशान बच्चों को तत्काल मदद पहुॅचाना है और उनको गलत तथ्यों में जाने से बचाना है। इसके तहत अनाथ बच्चों के भरण-पोषण, शिक्षा, चिकित्सा आदि की व्यवस्थाओं को पूरा ध्यान शासन द्वारा रखा जायेगा। उ0प्र0 मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जिन बच्चों को लाभान्वित किया जाना है उनकी श्रेणी तय की गयी है। योजना में शून्य से 18 वर्ष के ऐसे बच्चे शामिल किये जायेंगे जिनके माता-पिता दोंनो की मृत्यु कोविड-19 से हो गयी है या माता-पिता में से एक की मृत्यु मार्च 2020 से पहले हो गयी है और दूसरे की मृत्यु कोविड काल में हो गयी है अथवा दोंनों की मृत्यु 01 मार्च 2020 से पहले हो गयी थी इसके अतिरिक्त शून्य से 18 वर्ष के ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता में से किसी एक की मृत्यु कोविड काल में हो गयी हो और वह परिवार का मुखिया हो और वर्तमान में जीवित माता-पिता सहित परिवार की आय 2,00,000/रु0 से अधिक ना हो ऐसे लोगों को योजना में शामिल किया जायेगा।
सचिव ने बताया कि इस योजना की श्रेणी में आने वाले शून्य से 10 वर्ष के बच्चों के वैध संरक्षण के बैंक खाते में 4,000/रु0 प्रतिमाह दिये जायेंगें। इसके साथ यह शर्त भी होगी कि औपचारिक शिक्षा के लिए बच्चे का पंजीयन किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में कराया गया हो। संरक्षण द्वारा बच्चे के स्वास्थ्य और पोषण का पूरा ध्यान रखा जा रहा हो। इसके अतिरिक्त ऐसे बच्चे जो पूर्णतः अनाथ हो गये हो और बाल कल्याण समिति के आदेश के तहत संचालित बाल देखभाल संस्थाओं में आवासित कराये गये हों, उनको कक्षा-06 से कक्षा-12 तक की शिक्षा के लिये अटल आवासीय विद्यालय व कस्तूरवा गाॅधी आवासीय विद्यालय मे प्रवेश कराया जायेगा। इसके अतिरिक्त योजना में दी गयी समस्त जानकारी प्रदान की गयी।
उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों की चल-अचल सम्पत्ति की सुरक्षा के प्रबन्ध होेंगें। जिला बाल संरक्षण ईकाई व बाल कल्याण समिति चिन्हांकन के 15 दिन के अन्दर आवेदन प्रक्रिया पूर्ण करायी जायेगी। आवेदन निर्धारित प्रारूप पर पूर्ण भर कर आॅफलाइन तरीके से ग्रामीण क्षेत्र के ग्राम पंचायत अधिकारी, विकास खण्ड या जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय पर जमा कराना होगा। शहरी क्षेत्र में लेखपाल, तहसीलदार या जिला प्रोबेशन अधिकरी कार्यालय में जमा किये जा सकते हैं। माता-पिता की मृत्यु से 02 वर्ष के अन्दर आवेदन तथा अनुमोदन की तिथि से लाभ अनुबन्ध होगा।

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