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प्रतापगढ़
यूपी के प्रतापगढ़ जिले के लालगंज कोतवाली इलाके के अजगरा गांव में घर पर अकेली मौजूद जिस दलित युवती को दबंगों ने जिंदा जलाया था, मंगलवार को उसकी मौत हो गई। युवती को जिंदा जलाकर सोमवार को फरार हो गए दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

मृत युवती की मां ने पुलिस को सोमवार को पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि डॉक्टर बंगाली रंजिश के चलते अपने बेटे कल्लू के साथ मिलकर उनकी 19 साल की बेटी अंजू को जिंदा आग के हवाले कर दिया और बाहर से दरवाजा बंद कर फरार हो गए।

घर में सुनी चीख
सोमवार की शाम को इस वारदात के बाद घर के सामने से एक स्थानीय युवक गुजर रहा था को उसने घर के भीतर से आ रही चीख सुनी। जब वह घर में घुसा तो वहां अंजू आग की लपटों में घिरी मदद के लिए चीख रही थी। युवक जान की परवाह किए बगैर अंजू को आग की लपटों से बचाने में जुट गया, जिसके चलते वह खुद भी झुलस गया।

चीख-पुकार सुनकर पड़ोस में गई मां घर आने के बाद आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद 80 प्रतिशत जल चुकी बेटी को इलाहबाद रेफर कर दिया।

पुरानी रंजिश 
पीड़िता के मां का आरोप है कि उसके बेटे बच्चन और बंगाली में साल भर पहले मारपीट हुई थी। इस मारपीट में बच्चन ने बंगाली को चाकू मर दिया था, जिसके बाद पुलिस ने आठ माह पहले उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बच्चन इन दिनों जेल में बंद है।

मां ने कहा कि इसके बाद से ही बंगाली उसके परिजनों को आए दिन मारता-पीटता रहता है। वह इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस थाने में भी कर चुकी है, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे बंगाली का मनोबल बढ़ता गया और नतीजा आज अंजू मर गयी। अगर इस मामले में पुलिस ने संजीदगी दिखाई होती और बंगाली के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की होती तो आज उनकी बेटी जिंदा होती।

इलाज के दौरान मौत 
एएसपी पश्चिमी बसन्त लाल का कहना है कि युवती की इलाज के दौरान मौत हो गई। युवती के परिजनों की तहरीर के मुताबिक मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले की जांच की जा रही है।

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