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उत्तर प्रदेश में अभी विधानसभा चुनाव का शंखनाद नहीं हुआ है परंतु सभी दलों ने अपनी अपनी गोटियां बिछाना शुरू कर दी हैं।2017 चुनाव में बरेली के समाजवादी पार्टी के किले को भेद कर भाजपा ने अपना कब्जा किया है अब अपना किला दोबारा हासिल करने के लिए सपा कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। ऊपर स्तर पर चल रहे अलग-अलग दलों से गठबंधन के साथ ही बरेली की नो विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के चयन की चर्चा गली मोहल्ला चौराहों पर तेज हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चा 118 बहेड़ी विधानसभा की है। यहां सपा के कद्दावर नेता राष्ट्रीय सचिव पूर्व में दर्जा राज्यमंत्री रहे अता उर रहमान और बसपा छोड़ सपा में आए नगर पालिका अध्यक्ष पति नसीम अहमद दोनों ही अपना-अपना दावा पेश कर रहे हैं जिसके चलते यह दोनों नेता टिकट पाने की लड़ाई में एक दूसरे को पटखनी देने के लिए भरसक कोशिश कर रहे हैं। जहां एक तरफ टिकट को लेकर समाजवादी पार्टी अंतर्कलह की शिकार है वहीं दूसरी ओर रालोद की निग़ाह भी अब बहेड़ी विधानसभा का आकर टिक गई है।

सपा से गठबंधन फाइनल होने के बात रालोद ने बरेली की बहेड़ी सीट को भी अपने कोटे में रखा है। रालोद का यह दावा सपा से टिकट के उम्मीदवारों को झटका दे सकता है। सपा यह सीट अगर रालोद को देने के लिए तैयार हुई तो सपा के प्रमुख दावेदार अता उर रहमान और नसीम अहमद के अरमानों पर पानी फिर जाएगा। रालोद ने इसलिए बहेडी विधानसभा सीट पर दावेदारी की है की यहां जाट वोटर 10,000 से अधिक है और इतना ही सिख बिरादरी का बोट भी मौजूद है और किसान आंदोलन के लिए बहेड़ी हमेशा आगे रही है। वहीं रालोद का समीकरण यह भी है कि बहेड़ी उसको मिलती है तो सपा के गठबंधन से ही सही रोहिलखंड में भी अपना खाता खोलकर अपने पैर पसार सकती है। यही वजह है कि रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंन चौधरी लगातार अखिलेश से बहेड़ी सीट की मांग कर रहे हैं और चौंकाने वाली बात यह है कि रालोद ने यहां पर अपने प्रत्याशी का चेहरा भी लगभग तय कर लिया है। और यह चेहरा है रवि ढाका का किसान नेता और चौधरी अजीत सिंह के नजदीकी रहे रवि ढाका लंबे समय से किसान आंदोलन से जुड़े रहे हैं। बहेड़ी 118 विधानसभा में रालोद से गठबंधन होने पर अब यहां ईमानदार छवि के निर्विवाद किसान नेता रवि ढाका के चुनाव लड़ने की चर्चाएं भी तेज हो गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंन चौधरी से परिवारिक संबंध होने के साथ ब्लाक प्रमुख के चुनाव से नाराज क्षेत्र के जाट और 3 कृषि कानूनों के दौरान संघर्षरत किसानों पर रवि ढाका का अपना खासा असर रहता है। रवि ढाका मूल रूप से मेरठ क्षेत्र के ही रहने वाले हैं। दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काफी परिवार रहता है। रवि ढाका के पिता शखेंद्र पाल सिंह सरकारी नौकरी से रिटायर हो कर यहां के नेशनल पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य रहे थे। शिक्षित परिवार के साथ ईमानदार छवि के नेता रवि ढाका छात्र जीवन से ही किसान नेता रहे हैं।

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