Visitors have accessed this post 57 times.

अलीगढ़ : डॉक्टरों को धरती का भगवान कहा जाता है। हरसंभव डॉक्टर मरीज की जान बचाने में अपनी पूरी कोशिश करते हैं । लेकिन प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर हॉस्पिटल तो खोल लेते हैं । पर डॉक्टरों की तैनाती हॉस्पिटल में नही करते हैं । जिसका खामियाजा मरीजो को अपनी जान देकर भुगतना पड़ता है।स्वास्थ्य विभाग ऐसे हॉस्पिटल संचालकों पर चन्द पैसों के लालच में किसी भी तरह की कार्यवाही नही करता

दरअसल मामला अलीगढ़ के रोरावर थाना क्षेत्र के अंतर्गत वेदांता हॉस्पिटल का है जहां पवन पुत्र बिहारी लाल थाना टप्पल गांव कोटा का निवासी अपना डेंगू का इलाज कराने के लिए एक प्राइवेट अस्पताल मैं परिजनों के द्वारा रात्रि में भर्ती कराया गया तब उसकी हालत ठीक थी लेकिन भर्ती कराने के चन्द घण्टों बाद ही मरीज की हालत बिगड़ने लगी तो डॉक्टरों में हड़कम्प मच गया डॉक्टरों ने इलाज करना शुरू कर दिया। लेकिन मरीज की हालत में सुधार नहीं हो सका। हालत बिगड़ते देख हॉस्पिटल के डॉक्टर ने मरीज को मृत घोषित कर दिया। जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल पर हंगामा काटना शुरू कर दिया । वहीं परिजनों का कहना था कि जब मरीज को भर्ती कराया गया था । तो उसकी हालत में सुधार था परिजनों का कहना था कि डॉक्टरों की लापरवाही से हमारे मरीज की जान गई है। हंगामा देख पुलिस को सूचना दी गयी । पुलिस के आने के बाद स्थिति को काबू में लाया गया । प्रशासन के द्वारा समझा-बुझाकर मरीज का पोस्टमार्टम करने को भेजा गया । वहीं परिजनों ने अस्पताल पर 1 लाख 11 हजार रुपये जमा कराने की बात कही तत्पश्चात प्रशासन के द्वारा मरीज की बताई गई रकम परिजनों को अस्पताल के डॉक्टरों के द्वारा लौटा दी गई वही हॉस्पिटल के डॉक्टरों का कहना था कि मरीजों के द्वारा बेवजह आरोप लगाए गए हैं अपनी ख्याति को बचाने के उद्देश्य से वह रकम लौटाई गई है ।

Input : ZA Khan

यह भी देखें : इस उद्योगपति ने उत्तर प्रदेश के विकास में दिया योगदान और बना यूपी का नायक

अपनी क्षेत्रीय ख़बरों के लिए डाउनलोड करें TV30 INDIA चैनल का एंड्राइड ऐप –

http://is.gd/ApbsnE

sasni new wave