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लखनऊ : 2018 में हुए 8 विधानसभा चुनावों में मोदी और भाजपा सिर्फ त्रिपुरा जैसे छोटे राज्य में जीत दर्ज कर पाने में सफल हुई।नागालैंड, मिजोरम और मेघालय में राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए जरूर सत्तारूढ़ हुआ।लेकिन, विधानसभाओं में इन गठबंधन सरकारों का नेतृत्व क्षेत्रीय दलों के पास रहा।छत्तीसगढ़,मध्यप्रदेश,राजस्थान, तेलांगना जैसे बड़े राज्यों में कहीं भी जनादेश भाजपा को नहीं मिला।लेकिन,चोर दरवाजे से भाजपाने मध्यप्रदेश की सत्ता हथिया ली।राजस्थान में उसने कोशिश कम नहीं की,लेकिन सफल नहीं हो पाई।

2019में 9विधानसभाओं के चुनाव हुए।इसमें सिर्फ अरूणाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्य में भाजपा या मोदी जीत दर्ज कर पाने में सफल हुए।सिक्किम में 32सीट में से 12सीट के लिए भाजपा ने उम्मीदवार खड़ा किए,लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई।हरियाणा और कर्नाटक में जनादेश भाजपा को नहीं मिला, लेकिन चोर दरवाजे से भाजपा सत्ता हथियाने में सफल हुई।झारखंड,उड़ीसा,तेलंगाना,आन्ध्रप्रदेश,और महाराष्ट्र कहीं भी भाजपा और मोदी को जनादेश नहीं मिला।
2020में सिर्फ दो विधानसभाओं के चुनाव हुए-दिल्ली में भाजपा बुरी तरह पिटी और बिहार में सत्ता में हिस्सेदार होकर भी खुद ही नहीं मानती कि जनादेश उसके पक्ष में है।
2021में 5विधानसभाओं के चुनाव हुए।असम और केन्द्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भाजपा और मोदी को जनादेश मिला जरूर है,लेकिन भाजपा और मोदी की मजबूरी थी कि असम में हेमंत बिस्वाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाना पड़ा,जो हाल- फिलहाल तक कांग्रेस में थे और कभी भी उनकी घर-वापसी हो सकती है।प.बंगाल,तमिलनाडु,केरल में भाजपा और मोदी की बड़ी हार के सामने असम और पुडुचेरी की जीत बहुत छोटी जीत है।

2019के आमचुनाव के बाद जहां भी विधानसभा चुनाव हुए,भाजपा के वोटों में जबरदस्त गिरावट दर्ज हुई है।महाराष्ट्र में आमचुनाव के दौरान उसे 51% वोट मिले थे,लेकिन अक्तूबर,2019में हुए विधानसभा चुनाव में उसे 42% मत मिले यानि कि वोटों में 9% की गिरावट दर्ज की गई।हरियाणा में आमचुनाव के दौरान भाजपा को 58% वोट मिले थे,लेकिन अक्तूबर,2019 में हुए विधानसभा चुनाव में 37% मत मिले यानि कि वोटों में 21% की गिरावट दर्ज की गई।आमचुनाव के दौरान झारखंड में भाजपा को 55%वोट मिले थे, लेकिन,दिसम्बर,2019 में हुए विधानसभा चुनाव में उसे 33% वोट मिले यानि कि 22%की गिरावट दर्ज हुई। आमचुनाव के दौरान दिल्ली में भाजपा को 57%वोट मिले थे,लेकिन फरवरी,2020में हुए विधानसभा चुनाव में उसे 40%मत मिले यानि कि 17%की गिरावट दर्ज हुई।आमचुनाव के दौरान भाजपा को बिहार में 49% वोट मिले थे,लेकिन नवंबर,2020में हुए विधानसभा चुनाव में उसे 38% वोट मिले यानि 11%की गिरावट दर्ज की गई।

अच्छे दिन आएंगे…,स्विस बैंकों से कालाधन वापस लाने का वादा,भ्रष्टाचारके खिलाफ जीरो टॉलरेंस का वादा,दो करोड़ युवकों को प्रतिवर्ष रोजगार देने का वादा इत्यादि के भरोसे मोदीजी ने अपने पक्ष में जबरदस्त परशेप्सन विकसित किया और देखते ही देखते वह अपराजेय दिखने लगे।
उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव,2017 के पहले मोदीजी ने उत्तरप्रदेश को उत्तमप्रदेश बनाने का,किसानों की आय दोगुना करने और बनारस को क्वेटो शहर बनाने का वादा किया था,जो झूठे जुमले साबित हुए हैं। उन्होंने उत्तरप्रदेश में डबल इंजन की सरकार का वादा किया था।
……आज,भाजपा उत्तरप्रदेश में डबल एंटी-इनकमबेंसी का सामना कर रही है।30अक्तूबर,2021को 14राज्यों में 3 लोकसभा की सीट और 29विधानसभा की सीटों के लिए उपचुनाव हुए,जिसमें भाजपा को जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा।
इंडिया टुडेके अप्रकाशित सर्वेक्षण में मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ 42%की गिरावट दर्ज करते हुए 66% से घटकर 24% बताई गई है।उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर योगीकी लोकप्रियता का ग्राफ 49% से घटकर 29% तक पहुंच गया है।

भाजपा को 2002 में 20.8%,2007 में 16.97%,2012 में 15% वोट मिले थे।इन तीनों ही चुनावों में भाजपा को समाजवादी पार्टी से कम वोट मिले थे।2017 में भाजपा के वोटों में जबरदस्त उछाल आया और वह 39.67% पर पहुंच गया।भाजपा के वोटों में यह जबरदस्त उछाल की वजह राष्ट्रीय राजनीति में मोदी का प्रवेश था।जाहिर सी बात है,भाजपा के कोर वोटर 15-20% ही हैं।

समाजवादी पार्टी को 2002 में 25.37%,2007 में 25.43%,2012 में 29.15% वोट मिले थे,तब वह अकेले दम पर सत्ता में आई थी।2017 में जब वह सत्ता गंवाकर 47सीटों पर सिमट गई,तो भी उसे 21.82% वोट मिले थे।2002,2007और 2012 में उसे भाजपा से ज्यादा वोट मिले थे।जाहिर सी बात है कि उसके कोर वोटर की संख्या भाजपा से तो ज्यादा ही हैं।

अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस से समझौता किया है,तो प्रादेशिक स्तर पर राष्ट्रीय लोकदल से,ओमप्रकाश राजभर जैसी छोटी पार्टियों से भी।चुनाव की तारीखों का एलान होते ही स्वामी प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में योगी मंत्रिमंडल के तीन मंत्री और 14विधायक समाजवादी पार्टी का रुख कर चुके हैं और कोई दो दर्जन से ज्यादा विधायक अभी कतार में हैं।उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव,2022 के संदर्भ में पब्लिक परशेप्सन के स्तर पर भाजपा में भगदड़ मची है और बिना चुनाव लड़ें ही भाजपा मैदान से बाहर हो चुकी है।

रिपोर्ट : पंकज कुमार श्रीवास्तव,