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भगवान बदरीनाथ के कपाट खुलने का दिन और समय तय हो गया है। बदरीनाथ मन्दिर के धर्माधिकारी भुवन उनियाल ने बताया कि बसन्त पंचमी के मौके पर टिहरी के पूर्व राजा के महल में बदरीनाथ मन्दिर के कपाट खोले जाने की तिथि एवं मुहूर्त निकालने के लिए परम्परागत पूजा की गई।

राज मनुजेंद्र शाह ने परंपरा को निभाते हुए राजपुरोहितों एवं अन्य विद्वानों की उपस्थिति में 30 अप्रैल 2018 की सुबह साढ़े चार बजे का मुहूर्त बद्रीनाथ के कपाट खुलने का तय किया है।

राजा मनुजेंद्र शाह ने इस मौके पर अपने उत्तराधिकारी की भी घोषणा की। राजा का कोई पुत्र नहीं है इसलिए उन्होंने अपनी पुत्री शिवजा कुमारी अरोड़ा को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया है। इनके बाद शिवजा ही बद्रीनाथ के कपाट खुलने की परंपरा को निभाएंगी।

बदरीनाथ धाम की परंपरा में टिहरी के राजा को बोलंदा बद्रीश का प्रतीक माना जाता है यानी बोलते हुए बद्री भगवान। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की ऐसी परंपरा है कि बसंत पंचमी के दिन ही यह तय किया जाता है कि मंदिर के कपाट किस दिन खुलेंगे और शुभ मुहूर्त क्या होगा।

बद्रीनाथ धाम की परंपरा के अनुसार जब कपाट खुलने की तिथि की घोषण हो जाती है तो राजमहल की कुंवारी कन्याएं और महारानी तिल का तेल निकालकर गाडू घड़े में रखती हैं। इसके बाद घड़े को खूब सुंदर तरीके सजाया जाता है और बदरीनाथ के कपाट खुलने से 16 दिन पहले गाडू घडी तेल कलश शोभा यात्रा निकलती है। जो बदरीनाथ के पुजारियों के गांव डिम्मर सिमली होते हुए बदरीनाथ पहुंचती है। कपाट कपाट खुलने के बाद हर दिन बदरीनाथ के अभिषेक में इस तिल के तेल का प्रयोग किया जाता है।

 

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