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बरेली  : जब शादी-विवाह,और अपने ऐशो इशरत पर लाखो लाख रूपये खर्च करता है तब फुज़ुल खर्ची दिखाई नही देती , गरीब व मिसकीन लड़कियों की शादी,नादार के इलाज की फिक्र नही होती और ना इस संबंध में कोई पोस्ट डालता है।मगर जैसे ही माहे रबीउल अव्वल का चांद निकलता है और आशिक व वफादारे नबी को ईद मीलादुन्नबी की खुशी में सजावट करते,लंगर करते,जलसा व जुलूस करते देखता है तो यह शैतान मारे हसद व जलन में समाज सेवक की सुरत में गरीब,बीमार,यतीम बच्चियों का खैर खुवाह बन कर यौमे विलादते नबी की खुशी में इन सब कामों में होने वाले खर्च को फुजुल खर्ची बताने लगता है और मुफ्त का मशवरा देते हुए गरीब व लाचार बचियों और बीमारों के ईलाज की दुहाई देकर इन कामों को रोकने की नापाक कोशिश करने लगता है।
सुन्नी तो अपने नबी के यौमे पैदाइश पर भी दिल खोल कर खर्च करता है और गरीब व यतीमों की भी मदद करता है।
सुनो ऐ गुसताखो!
जो आशिक और वफादार होते हैं वह अपने आक़ा की अज़मत जिस काम में भी देखते हैं करने लगते हैं और जो गद्दार होते हैं वह ताज़ीमे नबी पर मुशतमिल कामों की भी दलीलें मांगते हैं।
यही है आशिक व वफादार और गद्दार व गुस्ताख का फरक।
अरे ऐ बद बखत!
अपने आक़ा के यौमे मीलाद की खुशी के इज़हार के लिए भी तुझे दलील चाहिए?
तुफ है तुझ पर!!!
धिक्कार है तुझ पर!!!
किया कलमा पढाने का भी एहसान गया |

fazal

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