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सिकंदराराऊ : क्षेत्र के बाजिदपुर में पंचमुखी महादेव मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में डीजे की धुन पर आगे नाचते गाते भक्तजन, महिलायें मंगल गीतों की स्वरलहरियां बिखेरती चल रही थी। रामकथा कथा पंडाल पहुंच कर संपन्न हुई।
इसके बाद विधिवत पूजा अर्चना के साथ व्यास की स्थापना की गई। परीक्षित की भूमिका पप्पू सिंह राजपूत ने सपत्निक निभाई।
कथा व्यास प.ब्रजेश पाठक ने कहा कि रामचरित्र मानस भारतीय धर्म व संस्कृति का प्रतिबिम्ब है। रामचरित मानस केवल एक ग्रंथ नही बल्कि आर्यावृत्त की धर्म व संस्कृति को प्रकट करने वाला विशिष्ट पुराण है। कथा व्यास प. पाठक ने कहा कि रामचरित मानस की रचना कर महर्षि तुलसीदासजी ने भारतवासियो पर अंनत उपकार किया है। यह ग्रंथ शिव व हरी विष्णु की महिमा को एकाकार करने की प्रेरणा देता है। रामचरित मानस में शिव व पार्वती की कथा एवं उसके बाद प्रभु श्रीराम की कथा दोनो ग्रंथ में समाहित है। उन्होंने कहा कि जो भी धर्मालुजन रामचरित मानस की पौथी का पूरे मन वचन काया से पूजन करते है तथा आपने अपने घरो में इसका पाठ करते है। उन्हे प्रभु शिव व प्रभु राम दोनों की कृपा प्राप्त होती है। जीवन में जब भी रामकथा सुनने का अवसर मिले उस अवसर को नहीं चुकने दे। प्रभु राम भारत की भूमि पर निवास करने वाले करोडो लोगों की आस्था व विश्वास के प्रतीक है।

vinay

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