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सिकंदराराऊ : क्षेत्र के गांव महमूदपुर ब्राह्मणान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी ने पूजा अर्चना की । इस अवसर पर श्री चतुर्वेदी का पटका उढाकर एवं फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन शनिवार को पूज्य व्यास श्रीनिवास दास शास्त्री जी ने श्रीकृष्ण और रुकमणी के विवाह की अमृत वर्षा का श्रद्धालुओं को रसपान कराया। श्रीमद् भागवत कथा के दौरान बीच बीच में सुंदर-सुंदर झांकियां प्रस्तुत की गई। व्यास जी ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य महारास लीला का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान की महारास लीला इतनी दिव्य है कि स्वयं भोलेनाथ उनके बाल रूप के दर्शन करने के लिए गोकुल पहुंच गए। मथुरा गमन प्रसंग में अक्रूर जी भगवान को लेने आए।
राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी ने कहा कि सनातन संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है । अपने धर्म और विचारधारा के प्रति सभी लोग जागरूक बने और समर्पित रहें।
नई पीढ़ी संस्कारों से विमुक्त होती जा रही है,जबकि हमारे संस्कार भारतीय संस्कृति और सभ्यता का मूल तत्व हैं।इनके बिना सनातन संस्कृति की कल्पना करना व्यर्थ है। संस्कार और भारतीय संस्कृति के लगातार हो रहे ह्रास के लिए हम सभी लोग जिम्मेदार हैं। हम अपने बच्चों को अपनी सभ्यता और संस्कारों से परिचित कराना जरूरी नहीं समझते बल्कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में शामिल होकर उन्हें संस्कृति से कहीं ना कहीं दूर ले जाने का कार्य कर रहे हैं।वास्तविकता को हम सभी लोगों को गहनता से समझना होगा और मंथन करना होगा। जहां भी समाज व संस्कार अथवा सनातन संस्कृति से संबंधित कोई भी आयोजन हो। उसमें सहभागिता करने के लिए अपने पूरे परिवार के साथ पहुंचें । खासतौर पर बच्चों को अवश्य साथ ले जाएं।
इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजक जगदीश प्रसाद शर्मा, बद्री प्रसाद शर्मा, अनुज शर्मा,अमित शर्मा,सुमित शर्मा, हिमांशु कटारा, विनय चतुर्वेदी, विष्णुकांत दीक्षित, नरेश चतुर्वेदी, राजीव चतुर्वेदी , रितिक पांडेय, माधव पंडित, अनंत देव चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।

vinay

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