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आगरा
समाजवादी पार्टी से पूर्व लोक सभा चुनाव में प्रत्याशी रहे महाराज सिंह धनगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एसपी नेता पर आरोप है कि उन्होंने 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में फर्जी प्रमाणपत्र लगाया था। उत्तर प्रदेश पुलिस ने आगरा थाने में यह एफआईआर दर्ज की है।

आगरा  के एक सामाजिक कार्यकर्ता श्याम प्रकाश बोदी ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद न्यायिक मैजिस्ट्रेट ने स्थानीय पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।

श्याम प्रकाश ने बताया कि सरकारी रेकॉर्ड्स, जमीनों के रजिस्ट्री रेकॉर्ड्स के अनुसार महाराज सिंह धनगर बघेल समुदाय के ओबीसी से आते हैं। उन्होंने बताया कि चूंकी महाराज सिंह का गोत्र धनगर है इसलिए वह अंग्रेजी स्पेलिंग के अनुसार धनगर लिखकर जिला प्रशासन के अधिकारियों को धोखे में रखकर अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र ले लिया।

उन्होंने कहा कि यह मामला 2012 में तब सामने आया जब 2012 में हुए नगर निकाय चुनाव में उन्होंने मेयर की पोस्ट के लिए खुद को अनुसूचित जाति का बताया। उन्होंने इसके लिए गाजियाबाद के फर्जी निवास प्रमाणपत्र की सहायता से फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाया। चुनाव के बाद गाजियाबाद प्रशासन ने जांच कराकर महाराज सिंह का प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया।

बाद में 2014 के लोकसभा चुनाव में एसपी नेता ने आगरा की सदर तहसील से फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया। सूरजमल इंटर कॉलेज से महाराज सिंह ने 18 साल पहले इंटर किया था। सदर तहसीलदार, लेखपाल और राजस्व इंस्पेक्टर सहित महाराज सूरजमल इंटर कॉलेज आगरा के प्रिंसिपल के साथ मिलकर 18 साल पुराने स्कूल रेकॉर्ड्स के साथ छेड़खानी की गई। मिलिभगत में शामिल किया।

हालांकि महाराज सिंह ने कहा कि उन पर लगे सभी आरोप झूठे हैं। उन्हें मैजिस्ट्रेट की जांच के बाद ही जाति प्रमाणपत्र दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि वह अनुसूचित जाति के हैं। उन्होंने कहा कि अगर श्याम प्रकाश को उनसे समस्या है तो वह उनके खिलाफ हाई कोर्ट जा सकते हैं।

महाराज सिंह धनगर के साथ तत्कालीन सदर तहसील के लेखपाल दिनेश सिंह, तत्कालीन राजस्व अधिकारी वीरेंद्र कुलश्रेष्ठ, तत्कालीन तहसीलदार संजीव ओझा, सूरजमल इंटर कॉलेज के क्लर्क सावितिर सोलंकी और स्कूल के अज्ञात प्रिंसिपल के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

इससे पहले सदर तहसील आगरा से बीजेपी के कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल को भी फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने का आरोप लग चुका है। हालांकि यह मामला अभी इलाहाबाद हाई कोर्ट में है।

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