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हाथरस : मानव सेवा को अपना जीवन-संकल्प मानने वाला निःस्वार्थ सेवा संस्थान एक बार फिर समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। संस्थान के रोटी बैंक अभियान ने बिना रुके लगातार 2900 दिन पूरे कर लिए हैं। यह उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि यदि सेवा निष्ठा, अनुशासन और निरंतरता के साथ की जाए, तो वह समाज की बड़ी से बड़ी चुनौती का समाधान बन सकती है।
निःस्वार्थ सेवा संस्थान का रोटी बैंक केवल भोजन वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भूख के खिलाफ एक निरंतर मानवीय प्रयास है। संस्थान का स्पष्ट संकल्प है—
“भूख से हम रोने नहीं देंगे, भूखा हम सोने नहीं देंगे।”
इसी भावना के साथ प्रतिदिन जरूरतमंदों तक ताजा भोजन पहुँचाया जाता है, ताकि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे।
रोटी बैंक के माध्यम से प्रतिदिन गरीबों, असहायों, मजदूरों, बेसहारा लोगों और राहगीरों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इस सेवा का उद्देश्य केवल पेट भरना नहीं, बल्कि भूखे व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लौटाना भी है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर संस्थान के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने कहा कि 2900 दिनों की यह निरंतर यात्रा संस्थान के समर्पण, अनुशासन और टीम भावना का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय जनता के अटूट सहयोग और सदस्यों की निःस्वार्थ मेहनत को दिया। उन्होंने बताया कि समाज के विभिन्न वर्गों के सहयोग से ही यह संभव हो पाया है कि पिछले कई वर्षों से एक भी दिन भोजन वितरण का कार्य नहीं रुका।
पिछले 2900 दिनों में, चाहे कड़ाके की ठंड हो, मूसलाधार बारिश या चिलचिलाती धूप—संस्थान के सदस्यों ने सेवा का हाथ कभी पीछे नहीं खींचा। आज रोटी बैंक के 2900 दिन पूरे होने की यह उपलब्धि केवल संस्था की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जीत है। यह संदेश देती है कि यदि हम सब मिलकर जिम्मेदारी लें, तो कोई भी भूखा नहीं रहेगा।
इस अवसर पर अध्यक्ष सुनील अग्रवाल, सचिव नीरज गोयल, सह-सचिव तरुण राघव, सह-सचिव निश्कर्ष गर्ग, सतेंद्र मोहन, अवधेश कुमार बंटी, टेकपाल कुशवाह, मयंक ठाकुर, सौरभ शर्मा, आलोक अग्रवाल, सुनील कुमार सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।