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हाथरस। मानव अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्यरत एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट्स (ADHR) संस्था ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश करते हुए दो अज्ञात शवों का धार्मिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कराया। समाजसेवी सुनीत आर्य के नेतृत्व में यह कार्य संपन्न हुआ, जिसमें संस्था के पदाधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पहला शव सिकंदराराऊ कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत पंत चौराहे से आगे कासगंज रोड पर मिला। लगभग 35 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति के पैरों पर गंभीर चोट के निशान थे, जिससे प्रथम दृष्टया यह मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हुआ। मृतक ने क्रीम कलर की पैंट-शर्ट पहन रखी थी।
वहीं दूसरा शव हाथरस सिटी जीआरपी को रेलवे स्टेशन हाथरस रोड के किनारे जली अवस्था में मिला। मृतक साधु की उम्र लगभग 45 से 50 वर्ष आंकी गई है। पुलिस द्वारा दोनों शवों को 72 घंटे तक शिनाख्त के लिए सुरक्षित रखा गया, लेकिन पहचान न हो पाने के कारण उन्हें लावारिस घोषित कर पोस्टमार्टम कराया गया।
इसके बाद पुलिस प्रशासन द्वारा समाजसेवी सुनीत आर्य और प्रवीन वार्ष्णेय से संपर्क कर अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया। एडीएचआर संस्था के सहयोग से दोनों शवों का हिंदू रीति-रिवाज से विधिवत दाह संस्कार किया गया।
इस दौरान एडीएचआर उपाध्यक्ष हर्ष मित्तल, एनएसएस अध्यक्ष सुनील अग्रवाल, आयोग दीपक, बंटी भाई कपड़े वाले, तरुण राघव, नीरज गोयल, दीपांशु वार्ष्णेय, टेकपाल कुशवाहा, यश वार्ष्णेय, विशाल सौनी, आलोक अग्रवाल, कांस्टेबल इकबाल खान, होमगार्ड उमेश यादव, कांस्टेबल संदीप चौधरी, मुनेश कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
समाजसेवियों ने बताया कि संस्था लगातार लावारिस एवं अज्ञात शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार का कार्य कर रही है, ताकि हर व्यक्ति को मृत्यु के बाद भी गरिमा और सम्मान मिल सके। संस्था का यह प्रयास समाज में मानवता और संवेदनशीलता का संदेश देता है।










