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हसायन के ओएमबी इंटरनेशनल स्कूल में कौशल-आधारित आकलन पर दो दिवसीय विशेष कार्यशाला
नई शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के बाद से विद्यालयों और शिक्षकों पर यह अपेक्षा की जाने लगी है कि वे विद्यार्थियों की केवल स्मृति-आधारित जानकारी को ही नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक क्षमताओं और कौशलों को भी पहचानें तथा उनका विकास करें। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ओएमबी इंटरनेशनल स्कूल ने इस विषय पर एक दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। किया।दीप प्रज्वलन एवं औपचारिक शुभारंभ के पश्चात् कार्यक्रम की शुरुआत प्रेरणादायी शब्दों और स्वागत संबोधन से हुई।इस प्रयोगशाला का मुख्य उद्देश्य था शिक्षकों को कौशल-आधारित आकलन की अवधारणा से परिचित कराना।मूल्यांकन की पारंपरिक पद्धतियों और नई पद्धतियों के बीच अंतर को समझाना।अध्यापकों को विद्यार्थियों की समझ, विश्लेषण क्षमता, समस्या-समाधान और रचनात्मकता को आंकने की विधियों में दक्ष बनाना।जनपद के विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के बीच सहयोग और अनुभव-साझाकरण का अवसर उपलब्ध कराना।इस कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विद्यालयों से कुल 46 अध्यापकों ने प्रतिभाग विद्यालय परिवार की ओर से आए हुए सभी अतिथियों तथा प्रतिभागी अध्यापकों का हार्दिक स्वागत किया गया। प्रथम दिन के मुख्य सत्र का संचालन महर्षि विद्या मंदिर, अलीगढ़ से अनुप्रिया गुप्ता ने किया। उनके साथ विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री दीपक कुमार ने सह-रिसोर्स पर्सन के रूप में सत्रों का संचालन किया।दोनों ने मिलकर पूरे दिन की गतिविधियों को इस तरह से डिज़ाइन किया कि प्रतिभागी अध्यापक केवल सुनने या नोट करने तक ही सीमित न रहें, बल्कि वे सक्रिय भागीदारी के माध्यम से स्वयं सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बनें।रिसोर्स पर्सन श्री दीपक कुमार ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने अध्यापकों को यह समझाया कि कौशल-आधारित आकलन को लागू करने के लिए शिक्षण-पद्धति में भी बदलाव जरूरी है।यदि शिक्षक केवल लेक्चर पद्धति अपनाएँगे तो विद्यार्थियों में कौशल का विकास संभव नहीं होगा।कक्षा में प्रोजेक्ट वर्क, प्रयोगात्मक गतिविधियाँ, केस स्टडी और समूह चर्चा जैसी तकनीकें अपनानी होंगी।उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों से कहा कि वे इस प्रशिक्षण को केवल कार्यशाला तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपनी कक्षाओं में लागू करने का प्रयास करें।विद्यालय के डायरेक्टर श्री सेठ ओम प्रकाश यादव और मैनेजर श्री सुभाष यादव ने समापन अवसर पर कहा कि—शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा पास कराना नहीं, बल्कि जीवन में सक्षम बनाना है।ऐसी कार्यशालाएँ शिक्षकों को उस दिशा में आगे बढ़ने के लिए सशक्त करती हैं। दूसरे दिन के अंतिम सत्र में फीडबैक और समापन समारोह आयोजित किया गया। यह दो दिवसीय प्रयोगशाला केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षकों के लिए नई सोच, नए दृष्टिकोण और व्यावहारिक कौशल सीखने का एक सशक्त माध्यम साबित हुआ।
INPUT – YATENDRA PRATAP











