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सासनी : बुजुर्ग दिवस के अवसर पर नगर की सामाजिक साहित्यिक संस्था
साहित्यानंद द्वारा बुजुर्गों के सम्मान में सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन संस्था के संस्थापक पंडित रामनिवास उपाध्याय की अध्यक्षता एवं वीरेंद्र जैन नारद के कुशल संचालन में किया गया।
गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष अध्यक्ष द्वारा दीप प्रज्ज्वलन करने एवं शैलेश अवस्थी की सरस्वती वंदना के सस्वर पाठ होने के बाद उन्होंने सुनाया —
प्यार करो राधा कृष्ण के जैसा प्रेम करो मीरा के जैसा सेवा करो यूं श्रवण के जैसा आतिथ्य करो शबरी के जैसा इस के बाद कवि नरेश निरंजन ने सुनाया–दिल मेरा गिरवीं रखा है मैं ने जिसके प्यार में उम्र मेरी कट रही है उसके इंतजार में ।इसके बाद बारी आई डॉक्टर प्रभात कुमार की उन्होंने अपनी कविता के भाव प्रस्तुत करते हुए कहा–गड्ढे जिन सड़कों पर हैं उन सड़कों का हम क्या करें दिल तोड़ने वाले लड़कों का हम क्या करें। इसके बाद विष्णु शर्मा ने सुनाया–ब्रज में कन्हैया को बलदाऊ के भैय्या कौ
और जमुना मैया कौ बड़ौ ही महत्व है। इसके बाद डॉ कासिम ने सुनाया–दिल में किसी के द्वेष ना हो आपस में कोई क्लेश ना हो भाई चारा चर जाए ऐसा कोई संदेश ना हो। इसके बाद पप्पू टेलर ने सुनाया–अंदर बाहर आग लगी है दिल अंदर से रोता है बूढ़े कांधों पर जब कोई गम का बोझा ढोता है। इसके बाद नेहा वार्ष्णेय ने सुनाया हम जो भी हैं आज बुजुर्गों के ही आशीर्वाद से
इसके बाद संचालन कर रहे वीरेंद्र जैन नारद ने सुनाया बूढ़ा जब तक काम करे वह बूढ़ा नहीं कहलाता है बूढ़ा ही तो बच्चों को जीने की राह बताता है। इसके बाद कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पंडित रामनिवास उपाध्याय ने सुनाया क्या बुजुर्गों को मिला है बोलिए सरकार में योजनाएं बन रही हैं अब तो बस अखबार में। इनके अलावा अखिल प्रकाश सुरेश सरस महेंद्र पाल मृदुल जगदीश जिंदल प्रदीप भारती योगेश त्रिवेदी रमेश रंजिश की कविताएं भी सराहनीय रही। बुजुर्गों के सम्मान के साथ ही गोष्ठी का समापन किया गया।
INPUT – BEAURO REPORT











