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सासनी कस्बा में नगर के बुजुर्गों की सामाजिक साहित्यक संस्थ साहित्यानंद के बैनरतले वाल्मीकिजयंती के पावन मौके पर अवस्थी हाउस पर कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें विभन्न मशहूर कवियों ने अपनी कविता के माध्यम से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।शनिवार की देर शाम हुई कविगोष्ठी धर्मेन्द्र यदुवंशी व वीरेन्द्र सोलंकी की अध्यक्षता व निर्देशन में की गई। जिसका कुशल संचालन अशोक अग्रवाल ने किया। कविगोष्ठी का शुभारंभ गोष्ठी अध्यक्ष द्वारा मां सरस्वती के छबिचित्र के सामने दीप जलाकर एवं माल्यापर्णकर कर किया गया। कवि मयंक चैहान ने अपनी कविता में सुनाया कि हमो यूं रातभर तुम जगाया न कीजिए, पूरे न हो कभी ख्वाब दिखाया न कीजिए।। कवि पं. रामनिवास उपाध्याय ने सुनाया कि गांधी के शिष्य थे नेहरू और पटेल, तीनों ने मिलकर किया राजनीति का खेल।। वहीं कवि एमपी सिंह ने सुनाया कि जिनकोे कविता होती छोटी उनको भी गुरूर है, कविता गागर में सागर है, छोटी जरूर है।। कवि वीरपाल सिंह वीर ने अपनी कविता का समां यूं बांधा कि न रहा है और न रहेगा जमाना किसी का, पैसे के अहम में ये समझे न महत्व किसी का।। कवि रविराज सिंह ने सुनाया कि हालत खस्ता हो गई मोदी के ढंग, कामकाज को देख कर विपक्ष हुआ दंग।। कवि शैलेश अवस्थी ने सुनाया कि आओ गाथा सुनायें हनुमंत की उनका लंका में जाना गजब ढा गया। रावण ने सोचा कुछ और खुद की लंका को आग लगवा दिया।। कवि वीरेन्द्र जैन नारद ने सुनाया कि दिल किसी को सदा देता बतला, अब कोई नहीं आने वाला, मिट्टी के मकां वालों को यहां अब कम ही ठहरते है। कवि अशोक अग्रवाल ने सुनाया कि भारती मान का सम्मान थे वो असली हिन्दुत्व की पहचान थे बो।। इसके अलावा अन्य कवियों भी अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

input : avid hussain