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दिल्ली : कोरोना वायरस ने पूरी दुनियां में तबाही मचाई है। भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने भयंकर तबाही मचा राखी है। लेकिन चीन जहां दुनियां में कोरोना का सबसे पहला मामला सामने आया था वहां कुछ ही महीनों में हालात सामान्य हो गए। जबकि दुनियां के अन्य देश पिछले दो सालों से इस महामारी से जूझ रहे हैं। जिससे यह शक होने लगा है कि इस घातक महामारी के पीछे चीन का हाथ है। अब ऑस्ट्रेलिया की मीडिया ने यह दावा किया है कि चीन 2015 से कोरोना वायरस पर रिसर्च कर रहा था और इसे जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहता था। इससे पूर्व अमेरिका भी चीन पर इस तरह के आरोप लगा चुका है।

ऑस्ट्रेलिया की मीडिया ने दावा किया है कि चीन 2015 से कोरोना वायरस पर रिसर्च कर रहा था। द वीकेंड ऑस्ट्रेलियन ने चीन के एक रिसर्च पेपर को आधार बनाकर आरोप लगाए हैं कि चीन साल 2015 से सार्स कोरोना वायरस की मदद से जैविक हथियार बनाना चाहता था। रिसर्च पेपर में लिखा है कि तीसरा विश्व युद्ध हथियारों से नहीं लड़ा जाएगा। इसमें अब जैविक हथियार इस्तेमाल किए जाएंगे। जो अन्य हथियारों की तुलना में ज्यादा विध्वंसक होंगे। इस तरह के जैविक हथियारों से किसी भी देश के हेल्थ सिस्टम की कमर तोड़ी जा सकती है।

इनपुट : राज्य व्यूरो

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