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वाट्सपिया पत्रकारों का करो सम्मान
नहीं तो बन्द हो जायेगी तुम्हारी दुकान

यह लेख उन चिन्हित स्वघोषित अधिकृत पत्रकारों को समर्पित है जो एसी ऑफिसों में बैठकर अधिकारियों से रौव गालिव करते हुए वर्तमान की वेव पत्रकारिता पर सवालिया निशान खडे़ करते हैं और यह भी कहने से गुरेज नहीं करते कि आज कल पोर्टलों एवं वाट्सपिया पत्रकारों ने माहौल खराब कर रखा है ।
ऐसा नहीं है कि वह स्वघोषित अधिकृत पत्रकार हालातों से वाकिफ नहीं है ,लेकिन अधिकारियों से नजदीकिया कायम करने व अपना उल्लू सीधा करने के चक्कर में वह यह भी भूल जाते हैं कि जिस समय वह एसी ऑफिसों में बैठकर इस तरह की बात कर रहे होते हैं उस ही समय वही पोर्टल वाले पत्रकार उन्हीं जैसे पत्रकारों के लिए सुदूर ग्रामीण अंचलों में ख़बरें बना रहे (कवरेज) होते हैं ,और वह भी किस लालच में कि यदि उस ग्रामीण क्षेत्र की वह समस्या किसी प्रतिष्ठित सैटेलाइट चैनल पर चल गयी तो उस समस्या का निदान हो जायेगा और वहां के ग्रामीण उस पोर्टल वाले वाट्सपिया पत्रकार को थोड़ा सम्मान देने लगेंगे ,लेकिन अगर उस ख़बर को कवरेज करते समय कोई समस्या या विरोध उत्तपन्न होता है तो उसका खामियाजा उस वाट्सपिया पत्रकार को लम्बे समय तक चुकाना पड़ता है ।
अब यह तो बताने की आवश्यकता नहीं होगी कि कितने सैटेलाइट न्यूज चैनल अपने जिले के रिपोर्टर को सैलेरी /मानदेय देते हैं , आप अपनी अंगुलियों पर गिन सकते हो ऐसे चैनलों की संख्या को जो अपने जिला संवाददाता को सैलेरी देते हैं और वह भी इतनी नहीं देते हैं कि अगर यह पोर्टल वाले वाट्सपिया पत्रकार रूठ जायें और स्वयं उस स्वघोषित अधिकृत पत्रकार को पूरे जिले में ख़बरों की कवरेज करने जाना पडे़ तीसों दिन तो पैट्रोल भी भरवा सके , लेकिन फिर भी पोर्टल वाले पत्रकारों को निम्न दर्जे का माना जाता है ।
अब सेटेलाइट चैनलों की कार्यशैली तो आप जानते ही होंगे कि कुछ गिने चुने चैनलों छोड़ कर ज्यादातर सैटेलाइट चैनल तहसील स्तर पर अपना अधिकृत रिपोर्टर नहीं रखते है तो ऐसी परिस्थिति में यही पोर्टल वाले पत्रकार ही इन तथाकथित अधिकृत पत्रकारों के लिए संजीवनी बूटी का काम करते हैं , लेकिन यह फिर भी निम्न दर्जे के पोर्टल वाले पत्रकार कहलाते हैं ।
जब इन तथाकथित अधिकृत पत्रकारों के चैनल किसी ख़बर को नहीं चलाते हैं और उसमें अपना आर्थिक फायदा नुकसान तलासते है तब इन्हीं पोर्टल वाले वाट्सपिया पत्रकारों के पोर्टलों पर तुम्हारी ख़बरे बिना किसी नुकसान फायदे की परवाह किये चलती है और तुम्हारी समाज में बात रह जाती है , लेकिन फिर भी यह पोर्टल वाले पत्रकार निम्न दर्जे के वाट्सपिया पत्रकार कहलाते हैं ।
ऐसा नहीं हैं कि यह पोर्टल वाले वाट्सपिया पत्रकार ख़बरों की गंभीरता को नहीं समझते या इनमें योग्यता की कोई कमी पायी जाती है लेकिन यह बाजार में लगने वाली सेटेलाइट चैनलों की बोली ( सिक्योरिटी मनी / एडवांस विज्ञापन शुल्क) देने में या तो सक्षम नहीं होते हैं या फिर यह तरीका इनके जमीर को नहीं भाता है , लेकिन फिर भी पोर्टल वाले वाट्सपिया पत्रकार को निम्न दर्जे के कहलाते हैं ।

पोर्टल वाले वाट्सपिया पत्रकारों का सम्मान करना सीखो तथाकथित अधिकृत पत्रकारों , क्योकि इन ही के द्वारा लाये सामानों (ख़बरों) से तुम्हारी दुकानें सजती व चलती हैं ।

– राजदीप तोमर , पत्रकार

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