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सासनी : नगर की सामाजिक साहित्यिक संस्था साहित्यानंद द्वारा हिंदी दिवस पर कवि चौपाल का आयोजन कवि रवि राज सिंह की अध्यक्षता व वीरेन्द्र जैन के संचालन में किया गया। अध्यक्ष द्वारा मां सरस्वती के छवि चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के बाद कवि शैलेश अवस्थी ने सरस्वती वंदना का सस्वर पाठ करने के पश्चात कविता पाठ किया
*विडंबना! हाय हिंदी की मेरे भारत में कैसी है ऋषि मुनियों से जो जन्मी पराई आज कैसी है*
इसके बाद युवा हस्ताक्षर पप्पू टेलर ने सुनाया
*मां की ममता की तो अनमोल कहानी है जो भूलेगा मां को पड़े ठोकर खानी है* इसके बाद हास्य कवि वीरपाल सिंह वीर ने सुनाया *ना रहा ना रहेगा जमाना किसी का जो महत्व साली का वो होता ना किसी का* इसके बाद नेहा वार्ष्णेय ने सुनाया *कीचड़ के भी दिन फिर गए इसकी वजह से जब दो लोग आपस में भिड़ गए* कवि रामनिवास उपाध्याय ने सुनाया *ताजी रोटी रो रही हंस रही बासी ब्रेड हिंदी को बिंदी मिली इंग्लिश को दी ग्रेट* कवि रवि राज सिंह ने सुनाया *शदियों तक सोते रहे अब तो जागो भाई अब भी नहीं जागे तो होगी बहुत हंसाई* अशोक मिश्रा ने अपनी गजलों से गोष्टी को नई दिशा दी *तकदीर मेरी तेरी चाहत ने संवारी है छाया है नशा दिल पर नजरों में खुमारी है*
कवि एवं व्यंग्य कार वीरेंद्र जैन नारद ने सुनाया *भारत मां के माथे का सिंदूर है फिर भी हिंदी हम से कोसों दूर है* इसके बाद अध्यक्षीय उद्बोधन के साथ ही गोष्ठी का समापन हो गया
INPUT – BEAURO REPORT











