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मुरसान : घूरेमल बगीची में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने भगवान वामन अवतार और समुद्र मंथन की दिव्य कथा का श्रवण किया। कथा व्यास पंडित बालकिशन महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य के अनेक जन्मों के पापों का नाश होता है तथा जीवन में आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।उन्होंने कहा कि केवल कथा सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी शिक्षाओं को जीवन में उतारना भी आवश्यक है। भगवान विष्णु ने वामन अवतार के माध्यम से राजा बलि को यह संदेश दिया कि अहंकार, दंभ और अभिमान मनुष्य के पतन का कारण बनते हैं। सांसारिक धन-संपत्ति और वैभव क्षणभंगुर हैं, इसलिए मानव जीवन को परोपकार और सेवा के कार्यों में लगाना चाहिए। कथा वाचक ने कहा कि अहंकार, घृणा, ईर्ष्या और गर्व से मुक्त होकर ही मनुष्य ईश्वर की कृपा प्राप्त कर सकता है। ईर्ष्यालु व्यक्ति कभी भी जीवन में वास्तविक सफलता हासिल नहीं कर पाता। उन्होंने श्रद्धालुओं से सूर्य, वायु, नदियों, वृक्षों और बादलों जैसे प्रकृति के तत्वों से निःस्वार्थ सेवा और परोपकार की प्रेरणा लेने का आह्वान किया। कथा के दौरान भगवान वामन की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। वहीं भक्ति रस से ओत-प्रोत भजनों पर उपस्थित श्रद्धालु झूम उठे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम में पूर्व चेयरमैन गिरराज किशोर शर्मा एवं पूर्व चेयरमैन श्रीमती किरण शर्मा ने संयुक्त रूप से भागवत आचार्य का स्वागत एवं सम्मान किया। इस अवसर पर बंशीधर शर्मा, सुरेश शर्मा, संतोष कुमार, नरेंद्र कुमार एडवोकेट, सूरज शर्मा, एडवोकेट बुद्ध, सन शर्मा, अरुण शर्मा, वीरेंद्र शर्मा, बशंभर दयाल शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

INPUT – VIRENDRA SHARMA











