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हाथरस : सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन (पंजीकृत) की हाथरस जिला इकाई ने उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रपति और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन भेजा है। संगठन ने आयोग के स्तर पर मामलों के निस्तारण में कथित अनियमितताओं की जांच और व्यवस्थागत सुधार की मांग की है। एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष राजीव वार्ष्णेय के नेतृत्व में भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य आम नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का अधिकार देना है। संगठन का आरोप है कि कई मामलों में दस्तावेजी साक्ष्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता, जिससे सूचना मांगने वाले नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। राजीव वार्ष्णेय ने कहा कि यदि राज्य सूचना आयोग के किसी आदेश को लेकर नागरिक को आपत्ति होती है, तो आयोग स्तर पर प्रभावी Review Mechanism उपलब्ध नहीं होने से उसे हाईकोर्ट का रुख करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह प्रक्रिया कठिन हो सकती है। एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में हाथरस से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार, शिकायत संख्या एस-01/सी/0517/2025 में आयोग के ई-बुक पोर्टल पर अपलोड किए गए आदेश को कथित तौर पर अधूरा बताया गया है। संगठन ने इस मामले में दोबारा जांच और पत्रावली को पुनर्विचार के लिए बहाल करने की मांग की है। ज्ञापन में आयोग स्तर पर आंतरिक समीक्षा प्रकोष्ठ गठित करने, पुराने मामलों और अपूर्ण आदेशों की स्वतंत्र जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने जैसी मांगें शामिल हैं। इसके साथ ही संगठन ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के तहत कार्रवाई से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की मांग उठाई है। एसोसिएशन ने राष्ट्रपति और राज्यपाल से पूरे मामले में उचित स्तर पर जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

INPUT – AMIT SHARMA