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हाथरस दुनिया भर में प्रतिवर्ष 1 मई को मजदूर दिवस अथवा अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसे एक मई दिवस भी कहा जाता है।एक  मई दिवस समाज के उस वर्ग के नाम किया गया है, जिसके कंधों पर सही मायनों में विश्व की उन्नति का दारोमदार है। इसमें कोई दो राय नहीं कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति एवं राष्ट्रीय हितों को पूरा करने का प्रमुख भार इसी वर्ग के कंधों पर होता है। यह मजदूर वर्ग ही है, जो हाड़ तोड़ मेहनत के बलबूते पर राष्ट्र के प्रगति चक्र को तेजी से घुमाता है लेकिन कर्म को ही पूजा समझने वाला श्रमिक वर्ग श्रम कल्याण सुविधाओं के लिए आज भी तरस रहा है।
जी हाँ हम बात कर रहे उत्तर प्रदेश के हाथरस जनपद की जहाँ मजदूर  दिवस के दिन मजदूरो को यह तक नही पता था कि आज मजदूर दिवस है । और मजदूर दिवस के मायने क्या होते हैं ।
 मजदूर दिवस वाले  दिन  देशभर में बड़ी-बड़ी सभाएं होती हैं, बड़े-बड़े सेमीनार आयोजित किए जाते हैं, जिनमें मजदूरों के हितों की बड़ी-बड़ी योजनाएं बनती हैं और ढेर सारे लुभावने वायदे किए जाते हैं। सरकार समाचार पत्रों में मजदूरों के हित की योजनाओं के बड़े-बड़े विज्ञापन जारी करती है जिन्हें देख सुनकर एक बार तो यही लगता है कि मजदूरों के लिए अब कोई समस्या ही बाकी नहीं रहेगी। लोग इन खोखली घोषणाओं पर तालियां पीटकर अपने घर लौट जाते हैं किन्तु अगले ही दिन मजदूरों को पुन: उसी माहौल से रूबरू होना पड़ता है, फिर वही शोषण, अपमान व जिल्लत भरा तथा गुलामी जैसा जीवन जीने के लिए अभिशप्त होना पड़ता है।
मजदूरों के आत्म सम्मान का दिवस कहे जाने वाले इस दिन को लेकर इस तबके में कोई खास उत्साह, जोश और जुनून नहीं रह गया है। बढ़ती महंगाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों ने भी मजदूरों को उत्साह से दूर कर दिया है। मसलन अब मजदूर दिवस इनके लिए सिर्फ रस्म बनकर रह गया है। आलम यह है कि दो जून की रोटी, एक अदद छत और बच्चों के सुनहरे भविष्य के सपने संजोकर पराए प्रदेश में आकर हाड़-तोड़ मेहनत करने के बावजूद तिल-तिल सिसकती जिंदगी जी रहे इन मेहनतकश मजदूरों के लिए अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस जैसे आयोजन कोई मायने नहीं रखते।
मेहनतकश मजदूरों को उचित पारिश्रमिक दिलाने और उनके आर्थिक, सामाजिक हक दिलाने व उनके योगदान को मान्यता देने के लिए पूरी दुनिया में हर साल पहली मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन वैश्वीकरण और मुनाफे की अंधी दौड़ में मजदूरों का शोषण आज भी जारी है। जब मजूदरो से मजदूर दिवस के सबन्ध में बातचीत की तो मजदूरों को आज के दिन के बारे में पता नही था कि आज के दिन मजदूर दिवश मनाया जाता हैं  ।
INPUT – Brajmohan
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