Visitors have accessed this post 491 times.

न्याय बैठा थका -थका सा है
ये तो अन्याय का इलाका है

हिन्दी, उर्दू या आंग्ल की छोड़ो
प्रेम की तो स्वयं की भाषा है

तन ढके हों , उदर भर जाए
हमको इतने में जीना आता है

आत्मा कैद तन में हैं ऐसे
पंछी पिंजड़े में कसमसाता है

फौजदारी व दुश्मनी पल-पल
गाँवों को आजकल हुआ क्या है

मुश्किलें सिर झुका रहीं खुद ही
मुझ पै’ आशीष ये बड़ो का है

– अजय जादौन ‘अर्पण’

यह भी पढ़े : मनुष्य के पाप कर्मों द्वारा मिलने वाली सजाएं

अपने क्षेत्र की खबरों के लिए डाउनलोड करें TV30 INDIA एप

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.tv30ind1.webviewapp