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डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि ..लखनऊ में एक घटना हुई है उस घटना में एक विवेक तिवारी नाम के व्यक्ति की मौत हुई है सुबह के वक्त जब वह जा रहे थे गाड़ी से तो एक महिला अधिकारी के साथ वह वहां पर  थे दोनों कि एक ही कंपनी में काम कर रहे थे एक जगह जब गाड़ी खड़ी थी तो यूपी पुलिस के 2 सिपाही चेतक पर खड़े थे उन्होंने गाड़ी को इंटरसेप्ट किया और कहा कि गाड़ी से बाहर आए उन्होंने गाड़ी से निकलने की मना कर दिया और गाड़ी को चेतक पर चढ़ाने की कोशिश की सेल्फ डिफेंस में सिपाहियों ने गोली चलाई जिसमें गोली विवेक तिवारी की चीन पर लगी और बाद में गाड़ी जाकर एक्सीडेंट हो गई जिसमें विवेक तिवारी की मौत हो गई ये अपराध की श्रेणी में आता है पुलिस द्वारा फ़ौरन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया और दोनों सिपाहियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है और उनको आज शाम तक बर्खास्त कर दिया जाएगा किसी भी पुलिस अधिकारी को सेल्फ डिफेंस के तहत जान लेने का कोई अधिकार नही है   ..मैं समझता हूं कि यह हत्या का प्योर मामला है जो पुलिसकर्मियों ने किया है इसी के तहत उन पर हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है पोस्टमार्टम की कार्रवाई हो गई है पोस्टमार्टम में भी इस बात की पुष्टि हुई है गन शॉट इंजरी से विवेक की मौत हुई है …एक सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि  पुलिस का कोई गलत इस्तेमाल नहीं हो रहा है जहां भी इस तरह की कार्यवाही हो रही है उस पर सख्त कदम उठाया जा रहा है अगर पुलिसकर्मी गलत काम करते हैं तो उन्हें ना केवल गिरफ्तार किया जाता है ना केवल उन्हें सस्पेंड किया जाता है उन्हें बर्खास्त भी किया जाता है डीजीपी ने कहा कि उनका सीधा संवाद पुलिस से जुड़ने का एक कारण यह भी है कि वह बताना चाहते हैं कि पुलिसकर्मी समाज की सेवा जे लिए हैं ना की किसी के रक्षक या भक्षक की श्रेणी में आने के लिए है

INPUT – Manoj Bhatnagar

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