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देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई में चल रही ‘जंग’ पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अभी अपने नंबर एक और नंबर दो अफसरों की लड़ाई में उलझी है, जिसको लेकर मोदी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार देर रात बड़ी बैठक करने के साथ ही सरकार की तरफ से आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया।

दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेजना और नागेश्वर राव को सीबीआई की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला मंगलवार की रात को हुआ। नागेश्वर राव ने कामकाज संभालते हुए कड़ा रुख अख्तियार किया। नागेश्वर राव ने बुधवार सुबह ही ज्वाइंट डायरेक्टर अरुण शर्मा को जेडी पॉलिसी, जेडी एंटी करप्शन हेडक्वार्टर से हटा दिया। इसके अलावा AC III के डीआईजी मनीष सिन्हा को भी उनके पद से हटा दिया गया है। सीबीआई ने राकेश अस्थाना के मामले को फास्ट ट्रैक इन्वेस्टिगेशन में डाल दिया है।

आपको बता दें कि नागेश्वर राव 1986 बैच के आईपीएस अफसर हैं। नागेश्वर तेलंगाना के ओडिशा कैडर के आईपीएस अफसर हैं। उन्हें 5 साल के लिए सीबीआई का ज्वाइंट डायरेक्टर बनाया गया था। राव की छवि एक सख्त अफसर की रही है। उनके कामकाज का ही नतीजा है कि उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार, स्पेशल ड्यूटी मेडल, ओडिशा राज्यपाल मेडल समेत कई अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है।
नागेश्वर राव के करियर की शुरुआत ही बड़े धमाके के साथ हुई थी, उनकी पहली पोस्टिंग तालचेर में 1989-90 में हुई थी। तालचेर को कोयला माफियाओं का गढ़ माना जाता था। उन्होंने पोस्टिंग के बाद वहां कानून व्यवस्था में जबरदस्त सुधार किया था

INPUT – MANOJ BHATNAGAR

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