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सिकंदराराऊ : वैदिक ज्योतिष संस्थान के तत्वाधान में इस वर्ष सभी सनातन प्रेमियों के हित को ध्यान में रखते हुए जाटकों की कुंडली में ग्रहों के अशुभ संयोग से बन रहे कालसर्प दोष एवं पितृदोष से मुक्ति हेतु कई वर्षों बाद इस बार शनिवार से अनुष्ठान करवाया जाएगा।
संस्थान के सचिव आचार्य गौरव शास्त्री ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में राहु और केतु द्वारा निर्मित बुरे प्रभाव को कालसर्प दोष कहा जाता है। यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में राहु और केतु के बीच में ग्रह आ जाते हैं तो इस दोष को ही कालसर्प दोष कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में काल के नाम से राहु को दर्शाया जाता है, जिसका अर्थ मृत्यु होता है और सर्प को केतु का अधिदेवता कहा जाता है। राहु को सांप का मुख और केतु को सांप की पूंछ माना गया है। जिन जातक की कुंडली में कालसर्प दोष होता है उनकी कुंडली से राहु और केतु अच्छे प्रभाव को नष्ट कर देते हैं जिससे जातक को शारीरिक,मानसिक और सामाजिक कष्टों का सामना करना पड़ता है यानि कोई व्यक्ति बार बार के प्रयास के बाद भी सफल नहीं हो रहा हो या घर में निरंतर बीमारियों का घेराव रहता हो, आर्थिक परेशानी लगातार मेहनत करने के वावजूद भी दूर नहीं हो, घटना-दुर्घटना,विवाह में विलंब आदि बहुत से लक्षण इस दोष के होते है जिसका निवारण करना अत्यंत जरूरी रहता है।
गौरव शास्त्री ने कहा कि उक्त अनुष्ठान कल यानि शनिवार से प्रारंभ होकर अगले दो दिन अलीगढ़ स्थित खेरेश्वर महादेव मंदिर पर उसके अगले दिन यानि 21 अगस्त को गंगा घाट पर करवाया जाएगा जिसमें पूज्य गुरुदेव स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज के सानिध्य में विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक विधि विधान और मन्त्रों के साथ पूजा करवायी जाएगी।

INPUT – VINAY CHATURVEDI

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