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सिकंदराराऊ। गाँव बस्तोई में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पांचवे दिन कथावाचक गणेश चंद्र वशिष्ठ ने गोवर्धन लीला के साथ भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का प्रसंग सुनाया। भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण और पूतना वध के साथ माखनचोरी की लीलाओं का वर्णन किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी एवं वरिष्ठ समाजसेवी पूर्व सभासद चेतन शर्मा तथा अधिवक्ता धर्मेंद्र शर्मा ने व्यास पीठ की पूजा अर्चना की तथा पटका पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट करके कथा व्यास को सम्मानित किया । आयोजकों द्वारा उनका फूल माला पहनाकर स्वागत किया गया।

राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी ने कहा कि यह सनातन धर्म के पुनर्जागरण का दौरा चल रहा है। राम मंदिर की स्थापना से एक बार फिर सनातन धर्म की प्रामाणिकता सिद्ध हुई है।भगवान श्री रामचंद्र चिर सनातन संस्कृति के वाहक, हिन्दू धर्म की आस्था के प्रतीक हैं। भगवान श्री राम का भव्य मंदिर अयोध्या में बनने से कई दशक पुराना संकल्प पूर्ण हुआ है। पूरे विश्व में सनातन संस्कृति का डंका बज रहा है।आज जब सनातन समाज की युवा पीढ़ी अपसंस्कृति की शिकार हो रही है, तब राम मंदिर उसे सही रास्ते पर लाने का भव्य आध्यात्मिक प्रतीक बनेगा। नई पीढ़ी को संस्कार देने की आवश्यकता है। संस्कार राष्ट्र के चरित्र को मजबूत बनाते हैं। हिंदू संस्कृति पर प्राचीन काल से ही हमलों के षड्यंत्र रचे जाते रहे हैं।
कथा व्यास गणेश चंद्र वशिष्ठ ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं से जहां कंस के भेजे विभिन्न राक्षसों का संहार किया, वहीं ब्रज के लोगों को आनंद प्रदान किया। कथा के दौरान भगवान गिरिराज पर्वत को उठाते हुए सुंदर झांकी सजाई गई। इस दौरान भजनों पर श्रद्धालु देर तक नाचते रहे। प्रसंग में बताया गया कि इंद्र को अपनी सत्ता और शक्ति पर घमंड हो गया था। उसका गर्व दूर करने के लिए भगवान ने ब्रज मंडल में इंद्र की पूजा बंद कर गोवर्धन की पूजा शुरू करा दी। इससे गुस्साए इंद्र ने ब्रज मंडल पर भारी बरसात कराई। प्रलय से लोगों को बचाने के लिए भगवान ने कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। सात दिनों के बाद इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ।

इनपुट : विनय चतुर्वेदी