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मुरसान स्थित घुर्रीमल बगीची में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास बालकिशन महाराज ने श्रद्धालुओं को श्री सुखदेव जी महाराज के प्राकट्य और उनकी अद्भुत जन्म कथा का भावपूर्ण वर्णन सुनाया। कथा का श्रवण करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान की दिव्य लीलाओं का रसपान किया। कथा के दौरान बालकिशन महाराज ने बताया कि श्री सुखदेव जी महाराज ज्ञान, वैराग्य और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि सुखदेव जी महाराज ने 12 वर्षों तक अपनी माता के गर्भ में निवास किया था। उन्हें यह भय था कि जन्म लेने के बाद संसार की माया उन्हें अपने प्रभाव में ले लेगी। इसी कारण उन्होंने तब तक जन्म लेने की स्वीकृति नहीं दी, जब तक भगवान विष्णु ने उन्हें यह आश्वासन नहीं दिया कि माया का प्रभाव उन पर नहीं पड़ेगा। कथा व्यास ने भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को सुनाई गई अमर कथा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार उस समय सुखदेव जी शुक (तोते) के रूप में वहां उपस्थित थे और उन्होंने उस दिव्य कथा का श्रवण किया था। इसी कारण वे आजीवन ब्रह्मचारी, महान ज्ञानी और परम वैराग्यवान बने। इस अवसर पर पूर्व चेयरमैन गिर्राज किशोर शर्मा ने कथा व्यास बालकिशन महाराज को माला पहनाकर सम्मानित किया। कथा के परीक्षित सुरेश चंद्र शर्मा एवं उनकी पत्नी मीरा देवी भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम में पप्पू सेवक, बरसाती गुरु, गुड्डू शर्मा, किशन लाल, शुभ्रांशु उपाध्याय, बंशीधर शर्मा, राम प्रकाश शर्मा, राकेश सक्सेना सहित अनेक श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और कथा का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
INPUT – VIRENDRA SHARMA











