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हाथरस : श्री पारसनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़े मंदिर, हलवाई खाना में आयोजित प्रवचन के दौरान उपाध्याय श्री 108 शिवदत्त जी महाराज एवं मुनि श्री 108 पदमदत्त जी महाराज ने धर्म, दान और सदाचार का महत्व बताते हुए श्रद्धालुओं को जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज अधिकांश लोग दिन-रात केवल धन कमाने में लगे हैं और धर्म को पीछे छोड़ चुके हैं। धन कमाना गलत नहीं है, लेकिन उसका सदुपयोग धर्म, सेवा और दान के कार्यों में करना ही वास्तविक पुण्य है। मुनि श्री शिवदत्त सागर जी ने कहा कि मनुष्य अपने साथ धन नहीं ले जा सकता, इसलिए अपनी ईमानदारी से अर्जित आय का एक हिस्सा धार्मिक कार्यों, मंदिर निर्माण, मुनियों की सेवा और तीर्थ वंदना में लगाना चाहिए। उन्होंने भगवान आदिनाथ के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि परिवार के पालन-पोषण के साथ धर्म का पालन भी आवश्यक है और कमाई का एक भाग दान के लिए अवश्य निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि गलत तरीके से कमाया गया धन कभी स्थायी नहीं रहता और वह बीमारी या अन्य विपत्तियों में खर्च हो जाता है, जबकि धर्म में लगाया गया धन ही वास्तविक अर्थों में जीवन का सबसे बड़ा निवेश है। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रतिदिन कम से कम चार घंटे भगवान की भक्ति और धार्मिक कार्यों के लिए निकालने का आह्वान किया। प्रवचन में मुनि श्री ने समय के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सुबह जल्दी उठकर भगवान का स्मरण करता है, उसका जीवन अनुशासित और सफल बनता है। साथ ही उन्होंने गाय को पहली रोटी और कुत्ते को अंतिम रोटी देने की भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए करुणा, सेवा और जीव-दया का संदेश दिया। बुधवार को मुनि श्री की आहारचर्या मुरसान गेट स्थित मनीष जैन रंग के यहां संपन्न हुई। हलवाई खाना स्थित मंदिर से प्रस्थान के दौरान श्रद्धालुओं ने जयघोष के बीच जगह-जगह पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर सभासद धीरज जैन, बीना जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद रहे।

INPUT – RAHUL SHARMA