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हाथरस : ₹2,000 से अधिक के व्यापारी UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR (Merchant Discount Rate) लगाए जाने की व्यवस्था को लेकर संयुक्त उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने आपत्ति जताई है। व्यापार मंडल का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क से छोटे और मध्यम खुदरा व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है। इस संबंध में आयोजित बैठक में व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने बैंकिंग शुल्क और डिजिटल भुगतान से जुड़ी लागत को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। संगठन के संस्थापक राजीव वार्ष्णेय, विपिन वार्ष्णेय और कन्हैया वार्ष्णेय ने कहा कि व्यापारी पहले से टैक्स, दुकान का किराया, बिजली बिल, कर्मचारियों के वेतन और महंगाई जैसी बढ़ती लागत का सामना कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क व्यापारियों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। जिला अध्यक्ष जयपाल सिंह चौहान ने कहा कि व्यापारी ग्राहकों से प्राप्त भुगतान पर पहले से विभिन्न खर्च वहन करता है। उनके अनुसार, भुगतान प्राप्त करने की अतिरिक्त लागत भी व्यापारी पर डालना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार और आरबीआई से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की। जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरज वार्ष्णेय ने बैंकिंग सेवाओं से जुड़े विभिन्न शुल्कों का उल्लेख करते हुए कहा कि 0.4 प्रतिशत MDR छोटी दर दिखाई दे सकती है, लेकिन बड़े कारोबार में यह राशि व्यापारियों की लागत को प्रभावित कर सकती है। व्यापार मंडल ने विशेष रूप से छोटे और महिला व्यापारियों को लेकर चिंता जताई। संगठन का कहना है कि कम मार्जिन पर कारोबार करने वाले दुकानदारों के लिए अतिरिक्त भुगतान शुल्क महत्वपूर्ण आर्थिक बोझ बन सकता है। साथ ही, व्यापार मंडल ने आशंका जताई कि भुगतान संबंधी लागत बढ़ने पर उसका असर बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। व्यापार मंडल की प्रमुख मांग संयुक्त उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने सरकार और आरबीआई से ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर MDR लागू करने की व्यवस्था को वापस लेने की मांग की है। संगठन ने छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए निर्धारित टर्नओवर सीमा तक UPI भुगतान को शुल्क-मुक्त रखने की भी मांग रखी है। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि वे डिजिटल भुगतान के पक्ष में हैं, लेकिन व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

INPUT – AMIT SHARMA