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हाथरस। बृज कला केंद्र और राष्ट्रीय कवि संगम के संयुक्त तत्वावधान में “कविता चली गाँव की ओर” अभियान के तहत कैलोरा चौराहे पर विराट कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन में बृज मंडल के 50 से अधिक कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का आयोजन वरिष्ठ साहित्यकार, शोधकर्ता और “हाथरस के कवियों पर शोध” करने वाले डॉ. कर्ण सिंह निडर के 78वें जन्मदिवस एवं गुरु पूजा के अवसर पर किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व पुलिस अधीक्षक श्री आदित्य वर्मा एवं डॉ. कर्ण पाल सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। सरस्वती वंदना के साथ कवि सम्मेलन की शुरुआत हुई।
इस अवसर पर कवि चाँद हुसैन चाँद (पूर्व कोतवाल) ने अपने गुरु डॉ. कर्ण सिंह की अंग वस्त्र से पूजा कर शिष्य धर्म निभाया और संकल्प लिया कि गुरु के निधन के पश्चात उनके दाह संस्कार में चंदन की लकड़ी का प्रयोग करेंगे तथा एक दर्शनीय समाधि स्थल का निर्माण कराएँगे।
कवियों की प्रस्तुतियों में विविध भावनाओं और विषयों का समावेश रहा।
मीरा दीक्षित ने गुमनामी पर अपनी व्यथा व्यक्त की।
डॉ. मनीषा मनी ने प्रेम के बंधन को शब्द दिए।
गीतू महेश्वरी ने बिना रीति-रिवाज के प्रेम को प्राथमिकता दी।
देवेंद्र दीक्षित ‘शूल’ ने हिंदी विरोध के विरुद्ध जोरदार स्वर उठाया।
अन्य प्रमुख कवियों में डॉ. संगीता राज, उन्नति भारद्वाज, मंजू शर्मा ‘दाऊजी’, जयप्रकाश पचौरी, ग़ाफ़िल स्वामी, और चाँद हुसैन चाँद की प्रस्तुति सराहनीय रही।
इस अवसर पर आशु कवि अनिल बौहरे, ब्रज कला केंद्र के अध्यक्ष चंद्रगुप्त विक्रमादित्य, हिंदी प्रोत्साहन समिति के अध्यक्ष देवेंद्र दीक्षित ‘शूल’, नरेंद्र शर्मा ‘नरेंद्र’, अलीगढ़ से मनोज नागर, हरिभान सिंह ‘हरी’, अमिताभ शर्मा, तथा हाथरस से बाबा देवी सिंह ‘निडर’, मामा हाथरसी, श्याम बाबू ‘चिंतन’; सिकंदराराऊ से प्रमोद बिषधर, विवेक शील राघव आदि साहित्यकारों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. उपेंद्र झा और जयप्रकाश पचौरी ने किया।