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मुरसान के रेलवे स्टेशन के पीछे स्थित बगीची में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान मंगलवार को कथावाचक बालकृष्ण ने श्रद्धालुओं को गोवर्धन पूजा की पावन कथा सुनाई। कथा का श्रवण कर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कथावाचक बालकृष्ण ने बताया कि गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा देवराज इंद्र के अभिमान का हरण करने और गोवर्धन पर्वत की पूजा के महत्व का वर्णन किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह कथा केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि समाज को प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी देती है। उन्होंने श्रीमद्भागवत का उल्लेख करते हुए बताया कि ब्रजवासी प्रतिवर्ष वर्षा के देवता इंद्र की पूजा करते थे। उनका मानना था कि इंद्र की कृपा से वर्षा होती है, जिससे कृषि और पशुपालन सुचारु रूप से संचालित होते हैं। बाल रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने नंद बाबा और ब्रजवासियों से प्रश्न किया कि वे इंद्र की पूजा क्यों करते हैं। कथावाचक ने आगे कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को समझाया कि वर्षा और समृद्धि का वास्तविक आधार प्रकृति है। विशेष रूप से गोवर्धन पर्वत गायों के लिए चारा, जल और आश्रय प्रदान करता है। इसलिए प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर ब्रजवासियों ने इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की। उन्होंने गोवर्धन की परिक्रमा कर अन्नकूट का भोग लगाया और उत्सव मनाया। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रकृति संरक्षण, गौ सेवा और सामाजिक एकता का संदेश दिया गया। इस अवसर पर प्रसाद, संतोष शर्मा, रिंकू शर्मा, ओमप्रकाश शर्मा, रोहित कुमार, रोहित, अरुण, पीयूष, पंकज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

INPUT – VIRENDRA SHARMA