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हाथरस के हलवाई खाना स्थित श्री पारसनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़े मंदिर में सोमवार को उपाध्याय श्री 108 शिवदत्त जी महाराज एवं मुनि श्री 108 पदमदत्त जी महाराज के सान्निध्य में धर्मसभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा में मुनि श्री शिवदत्त जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आस्था, श्रद्धा, समर्पण, स्वाध्याय और संयम का महत्व बताया। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सच्ची श्रद्धा के साथ प्रतिदिन मंदिर में पूजा-अर्चना करता है, उसे प्रभु से कुछ मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि ईश्वर उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं करते हैं। उन्होंने कहा कि पूजा-पाठ के बाद भी यदि मन में दुःख या असंतोष बना रहे, तो व्यक्ति को अपने धार्मिक आचरण और समर्पण का आत्ममंथन करना चाहिए। मुनि श्री ने भगवान के प्रति अटूट विश्वास रखने का संदेश देते हुए कहा कि जिस प्रकार व्यक्ति नाई पर विश्वास कर स्वयं को उसके हवाले कर देता है, उसी प्रकार भगवान के प्रति भी पूर्ण श्रद्धा और समर्पण का भाव होना चाहिए। उन्होंने जैन आगम के अनुसार जीवन जीने तथा दिगंबर साधुओं की सेवा को धर्म का महत्वपूर्ण अंग बताया। धर्मसभा के अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रतिदिन देवदर्शन करने, शांतिधारा के पश्चात णमोकार मंत्र का जाप करने और गंधोदक को मस्तक पर धारण करने का आग्रह किया। कार्यक्रम में श्री जैन नवयुवक सभा के अध्यक्ष उमाशंकर जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

INPUT – RAHUL SHARMA











