Visitors have accessed this post 7 times.
पुरदिल नगर के N.P. [S.S.] PUBLIC SCHOOL में आज भारत के महान दार्शनिक, शिक्षाविद् एवं देश के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस श्रद्धा, सम्मान एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करने के साथ हुआ। इस अवसर पर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उनके जीवन, शिक्षा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान तथा उनके आदर्शों को याद किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य दिनेश शर्मा स्नेही ने अपने संबोधन में कहा कि “शिक्षक केवल बच्चों को किताबों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि वह उनके जीवन को दिशा देता है। एक शिक्षक के हाथों में केवल चॉक और किताब नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी का भविष्य होता है। इसलिए शिक्षक होना केवल एक पद नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।” उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “जीवन में सफलता पाने के लिए केवल अच्छे अंक पर्याप्त नहीं हैं। एक अच्छा इंसान बनना, अपने माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करना, अनुशासन में रहना और कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना ही वास्तविक शिक्षा है। डॉ. राधाकृष्णन का जीवन हमें यही प्रेरणा देता है कि ज्ञान को अपने जीवन और समाज के कल्याण का माध्यम बनाएं।” प्रधानाचार्य ने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को शिक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें संस्कारी, आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और बेहतर नागरिक बनाना है। विद्यालय के प्रॉक्टर विष्णु शर्मा ने कहा कि “गुरु का स्थान हमारे जीवन में सबसे ऊँचा इसलिए है, क्योंकि गुरु हमें केवल यह नहीं बताता कि क्या पढ़ना है, बल्कि यह भी सिखाता है कि जीवन को किस तरह जीना है। जब विद्यार्थी अपने शिक्षक की मेहनत और उसके पीछे छिपे प्रेम को समझता है, तभी गुरु-शिष्य का रिश्ता वास्तव में सार्थक होता है।” उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि “आपके शिक्षक आपकी सफलता में अपना भविष्य देखते हैं। आपकी एक छोटी-सी सफलता भी उनके लिए बहुत बड़ी खुशी होती है। इसलिए अपने शिक्षकों के विश्वास को कभी टूटने मत देना। मेहनत करो, असफलताओं से सीखो और हर दिन अपने कल से बेहतर बनने का प्रयास करो।” उन्होंने कहा कि शिक्षक का सबसे बड़ा पुरस्कार उसके विद्यार्थी की सफलता और उसके अच्छे संस्कार हैं। विद्यालय के स्कूल कोऑर्डिनेटर राज कुमार रावल ने अपने संबोधन में कहा कि “शिक्षा वह प्रकाश है, जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करती है। इस प्रकाश को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य शिक्षक करता है। इसलिए शिक्षक समाज के सबसे महत्वपूर्ण निर्माणकर्ताओं में से एक है।” उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि “अपने शिक्षकों का सम्मान केवल शिक्षक दिवस के दिन नहीं, बल्कि हर दिन अपने व्यवहार, अनुशासन और मेहनत से करें। जब कोई विद्यार्थी अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है और एक अच्छा इंसान बनता है, तो उसके पीछे उसके माता-पिता के साथ-साथ उसके शिक्षकों की मेहनत भी होती है।” उन्होंने विद्यार्थियों को “सीखते रहो, आगे बढ़ते रहो और अपने जीवन से अपने गुरुजनों को गौरवान्वित करो” का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय में गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षा, संस्कार और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विचारों को विद्यार्थियों के जीवन से जोड़ते हुए प्रेरणादायक संदेश दिए गए। पूरे विद्यालय परिसर में सम्मान, उत्साह और भावनाओं का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार ने यह संकल्प लिया कि शिक्षा को केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित न रखकर ज्ञान, संस्कार, चरित्र और मानवता के निर्माण का माध्यम बनाया जाएगा। “एक शिक्षक स्वयं एक दीपक होता है—जो जलता है, तभी उसके विद्यार्थियों के जीवन में उजाला होता है।” 🪔📚 इस अवसर पर गगन तोमर, फुरकान , हिमांशु आर्या , अमित, रवि आर्य, ज्योति गोला, खुशबू, वर्षा, रूबी शर्मा, डौली, गौरी, अंजली, सोनम, राखी, दिव्या, गीता, रूवी, ईषा , तनिष्का आदि संग समस्त विद्यालय परिवार मौजूद रहा ।

INPUT – PUSHPAKANT SHARMA










