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हाथरस : विजयादशमी के पावन अवसर पर आगरा रोड स्थित श्री राधा कृष्ण कृपा भवन में वार्षिकोत्सव एवं पद्मश्री काका हाथरसी द्वारा स्थापित साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ब्रज कला केंद्र की हाथरस शाखा की नवनिर्मित कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया गया। साथ ही आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में हास्य, व्यंग्य, राष्ट्रभक्ति और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी रचनाओं ने श्रोताओं का मन मोह लिया। समारोह की अध्यक्षता संत तुलसी साहिब आश्रम के गद्दीधर महंत गुरु लोचन दास जी महाराज ने की। मुख्य अतिथि के रूप में ब्रज संगीत विद्यापीठ के कुलपति एवं अध्यक्ष राजेंद्र कृष्ण अग्रवाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयुक्त संचालन ब्रज कला केंद्र के अध्यक्ष चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य और आशु कवि अनिल बोहरे ने किया।
साहित्य और संस्कृति समाज को देते हैं सकारात्मक दिशा
मुख्य अतिथि राजेंद्र कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि साहित्य और संस्कृति समाज की पहचान हैं। साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक परिस्थितियों को उजागर करने के साथ लोगों को सकारात्मक सोच और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि पद्मश्री काका हाथरसी ने हास्य और व्यंग्य के माध्यम से हाथरस को साहित्यिक जगत में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनकी विरासत को आगे बढ़ाना सभी साहित्यप्रेमियों और सांस्कृतिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है। ब्रज कला केंद्र के अध्यक्ष चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने कहा कि संस्था का उद्देश्य काका हाथरसी की साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाना, कवियों एवं कलाकारों को मंच प्रदान करना और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने श्री राधा कृष्ण कृपा भवन को साहित्य, सामाजिक समरसता और सेवा की भावनाओं को समर्पित केंद्र बताते हुए सभी अतिथियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
राजकुमार वार्ष्णेय और सरिता वार्ष्णेय को स्मृति सम्मान
समारोह में श्री राधा कृष्ण कृपा भवन के संस्थापक कृष्ण गोपाल वार्ष्णेय ‘नेताजी’ तथा संस्थापिका स्वर्गीय कैलाश कुमारी की स्मृति में स्थापित सम्मान से समाजसेवी राजकुमार वार्ष्णेय और सरिता वार्ष्णेय को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मेला श्री दाऊजी महाराज रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों और साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में सहयोग देने वाले लोगों का भी सम्मान किया गया।
कवि सम्मेलन में हास्य, व्यंग्य और राष्ट्रभक्ति की प्रस्तुतियां
कवि सम्मेलन का शुभारंभ कवि दीपक रफी ने मां शारदा की वंदना के साथ किया। इसके बाद कवियों ने हास्य, व्यंग्य, गीत, गजल और ओजपूर्ण रचनाओं के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों, बदलते जीवन मूल्यों, मानवीय संबंधों और राष्ट्रप्रेम को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। हास्य-व्यंग्य की रचनाओं ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया, जबकि भावपूर्ण काव्य प्रस्तुतियों ने उन्हें चिंतन करने के लिए प्रेरित किया। कवि सम्मेलन में कृष्ण वर्मा, रोशन लाल वर्मा, डॉ. उपेंद्र झा, राणा मुनि प्रताप, वीरेंद्र पाठक, चंद हुसैन, चंद पुराण सागर, प्रभु दयाल दीक्षित, प्रभु सुखप्रीत सिंह ‘सुखी’, मनु दीक्षित, मनु रूपम कुशवाहा, श्याम बाबू चिंतन, प्रदीप अंजना, जयप्रकाश पचौरी, प्रमोद रिश्तेदार, पंडित हाथरसी, सुनील सोलंकी, बाबा देवी सिंह ‘निडर’, चाचा हाथरसी, मुस्ताक अहमद, वासुदेव उपाध्याय और सोनाली वासने सहित कई कवियों ने काव्यपाठ किया।
बांसुरी वादन और नशामुक्ति का दिया संदेश
कार्यक्रम में डॉ. मुरारी लाल ने बांसुरी वादन की मधुर प्रस्तुति दी। वहीं ब्रह्माकुमारी शांता बहन ने युवाओं को नशे से दूर रहने, सकारात्मक सोच अपनाने और बुजुर्गों की सेवा करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अच्छे संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और बुजुर्गों के प्रति सम्मान एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।
साहित्यकारों और गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में प्रमुख धर्मसेवी नन्नूमल गुप्ता, समाजसेवी विजय सिंह प्रेमी, कलेक्ट्रेट बार के पूर्व अध्यक्ष प्रेम सिंह यादव एडवोकेट, मेला बाबू शशिकांत गौतम, अपना घर आश्रम के संस्थापक मदनलाल वार्ष्णेय और अध्यक्ष दिलीप पोद्दार एडवोकेट सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। इसके अलावा शहर के कई साहित्यकार, समाजसेवी, अधिवक्ता, सांस्कृतिक कार्यकर्ता और अन्य गणमान्य नागरिक कार्यक्रम में शामिल हुए। समारोह ने हाथरस की साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने तथा समाजसेवा से जुड़े लोगों को सम्मानित करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य: पद्मश्री काका हाथरसी की साहित्यिक विरासत को संरक्षित करना, साहित्य एवं संस्कृति को प्रोत्साहित करना और समाज में सकारात्मकता, सद्भाव तथा सेवा की भावना को मजबूत बनाना।

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