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उत्तर प्रदेश पुलिस की लापरवाही और उत्पीड़न के मामले अकसर सामने आते हैं। इस खराब छवि के बीच भूपेंद्र सिंह ने यूपी पुलिस का सिर गर्व से ऊंचा किया है। प्रदेश के सहारनपुर में तैनात एक दरोगा को बेटी की मौत की खबर मिली। वह निकलते इससे पहले उन्हें 100 नंबर पर एक घायल को अस्पताल ले जाने की सूचना भी मिली। आंखों में आंसू भरकर भूपेंद्र ने मृत बेटी के पास जाने से पहले घायल को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। अब डीजीपी भूपेंद्र को उन्हें सम्मानित करेंगे।

भूपेंद्र सिंह तोमर की तैनाती सहारनपुर के बड़ागांव में 100 नंबर की पीआरवी पर है। उन्हें सूचना मिली कि रामपुर मनिहारन में एक व्यक्ति खून से लथपथ बेसुध अवस्था में सड़क के किनारे पड़ा है। उसे जल्दी अस्पताल पहुंचाएं। भूपेंद्र की पीआरवी उस घायल को लेने के लिए चल दी।

वे रास्ते में थे इसी दौरान उनके मोबाइल पर कॉल आई। भूपेंद्र ने फोन उठाया तो सामने महिला की रोने की आवाज आ रही थी। भूपेंद्र के हाथों से फोन छूट गया और उनकी आंखे नम हो गईं। उनके बगल में बैठे पांचाल को समझने में देरी नहीं लगी। पूछने पर उन्होंने बताया कि उनकी बेटी इस दुनिया में नहीं रही।

उनके साथ गाड़ी में मौजूद पुलिस कर्मियों ने उन्हें तत्काल घर जाने को कहा लेकिन भूपेंद्र ने कहा कि उनकी बेटी तो इस दुनिया में नहीं रही लेकिन जो घायल व्यक्ति है वह किसी के घर का बेटा है। उन्होंने कहा कि उनके घर की ज्योति बुझ गई लेकिन वह दूसरे के घर का चिराग नहीं बुझने देंगे।

उनके साथ मौजूद पुलिसकर्मियों की आंखों में भूपेंद्र की बात सुनकर आंसू आ गए। वे लोग मौके पर पहुंचे तब तक वहां कोई ऐंबुलेंस भी नहीं पहुंची थी। भूपेंद्र और उनके सहयोगी घायल को लेकर पीएचसी पहुंचे जहां से उसकी हालत गंभीर बताते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

वे लोग उसे लेकर हायर सेंटर पहुंचे। वहां घायल को भर्ती कराया गया। घायल को भर्ती कराकर भूपेंद्र उनके घर रवाना हुए। जब यह बात डीजीपी को पता चली तो उन्होंने भूपेंद्र को सैल्यूट किया और उन्हें सम्मानित करने की बात कही।

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